Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी ने फ़रमाया-आत्मा कब शरीर को छोड़कर चली जाती है?

राम-नाम ही इन्सान का सच्चा साथी: पूज्य गुरु जी

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सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि इन्सान जो कुछ भी बनाता है, एक दिन उसे सब कुछ यहीं पर छोड़कर जाना पड़ता है। इसलिए इन्सान अभिमान क्यों करता है? यह सब कुछ बादल की छाया की तरह है, जो हमेशा स्थिर नहीं रहती। उसी तरह इन्सान को लगता है कि जमीन-जायदाद, घर, बाल-बच्चे, सब मेरा है और इसके लिए आदमी दिन-रात लगा रहता है, लेकिन हकीकत में इन्सान का इनमें कुछ भी नहीं है। जब शरीर में आत्मा का समय पूरा हो जाता है तो सब कुछ छोड़कर एक दिन जाना पड़ेगा।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वो समय (मौत का समय) आने से पहले इन्सान को कुछ ऐसा बना लेना चाहिए, ताकि अगले जहान में आपका कोई साथी हो। यहां पर तो हर कोई बड़े संगी-साथी, यार-दोस्त, मित्र बनाते हैं, लेकिन ऐसा साथी बनाओ जो दोनों जहान में आपका साथ न छोड़े। ऐसा साथ देने वाला वो एक ही है, जिसे ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब या सतगुरु, मौला कहते हैं। वही एक ऐसा है, जो दोनों जहान में साथ देने वाला, रहमो-करम बरसाने वाला है। उस दया के सागर, रहमो-करम के मालिक को अगर पाना चाहते हो तो उसके लिए सुमिरन करो, वचनों को मानो।

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