Privatization of Islamabad Airport: नई दिल्ली। पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निजीकरण की दिशा में औपचारिक कदम बढ़ा दिए हैं। इससे पूर्व हवाई अड्डे के प्रबंधन और संचालन को संयुक्त अरब अमीरात को सौंपने का प्रस्ताव विचाराधीन था, किंतु अमीरात की ओर से स्पष्ट सहमति न मिलने के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। Pakistan News
प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, इस्लामाबाद हवाई अड्डे के संचालन के लिए यूएई की ओर से किसी अधिकृत इकाई का नाम अंतिम रूप से घोषित न किए जाने से दोनों पक्षों के बीच प्रक्रिया अटक गई। पाकिस्तान की ओर से अंतिम पत्राचार कर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया गया, परंतु अमीराती पक्ष ने किसी नामित संस्था की पुष्टि करने में असमर्थता जताई। इसके बाद पाकिस्तान ने इस परियोजना को प्रत्यक्ष निजीकरण की सूची में सम्मिलित कर लिया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के निजीकरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा चुकी है।
द्विपक्षीय हवाई संपर्क से संबंधित कुछ अतिरिक्त शर्तों पर भी सहमति नहीं बन सकी
सूत्रों के अनुसार, सरकार-से-सरकार समझौते के मसौदे में कराची स्थित जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और लाहौर का अल्लामा इकबाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल करने का प्रस्ताव अमीरात की ओर से रखा गया था, जिसे पाकिस्तान ने स्वीकार नहीं किया। साथ ही, द्विपक्षीय हवाई संपर्क से संबंधित कुछ अतिरिक्त शर्तों पर भी सहमति नहीं बन सकी।
निजीकरण मामलों पर प्रधानमंत्री के सलाहकार के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने अबू धाबी का दौरा कर संभावित समझौते पर चर्चा की थी। इससे पूर्व निजीकरण प्रभाग ने मंत्रिमंडलीय समिति के समक्ष इस्लामाबाद सहित प्रमुख हवाई अड्डों को सक्रिय निजीकरण सूची में शामिल करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था।
हाल में जारी विश्लेषणों में यह संकेत दिया गया है कि प्रशासनिक अक्षमताओं, सीमित जवाबदेही और वित्तीय कुप्रबंधन के कारण कई सरकारी उपक्रम लगातार घाटे में चल रहे हैं। जब इन संस्थानों पर ऋण और हानि का बोझ असहनीय हो जाता है, तब निजीकरण को अंतिम विकल्प के रूप में अपनाया जाता है। इसी पृष्ठभूमि में इस्लामाबाद हवाई अड्डे के निजीकरण को एक महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। Pakistan News















