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    अजय कुमार द्वारा बनाए दुग्ध उत्पादों के दीवाने हैं लोग

    sirsa

    दही, पनीर, मिठाइयां, आइसक्रीम, कुल्फी क्षेत्र के लोगों की पहली पसंद

    चौपटा (सच कहूँ/भगत सिंह)।
    कहते हैं कि अगर अपने लक्ष्य के प्रति आप पूरी तरह सजग हैं तो आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता है। ये बात हरियाणा में सरसा जिले के चौपटा खंड के गाँव जोड़कियां के किसान अजय कुमार चुरणियां पर स्टीक बैठती है। इस किसान पुत्र ने पिता रोहतास चुरणिया की खेती के साथ-साथ गाय पालन कर डेयरी फार्मिंग से आय बढ़ाकर परिवार को सशक्त बनाया। अजय कुमार अपनी 15 पालतू गायों के दूध के साथ-साथ आसपास के 200 किसानों व पशुपालकों से दूध एकत्रित कर अपनी डेयरी एकेसी फूड्स में दही, पनीर व मिठाइयां, बायो प्रोडक्ट तैयार कर बेचता है, जिससे उसे डेढ़ लाख रुपए प्रति महीना कमा रहा है। अजय द्वारा बनाए जा रहे उत्पाद क्षेत्र में मशहूर हैं। इसके साथ ही उसे विवाह, शादी या अन्य अवसरों पर मिठाइयां, दही, पनीर और घी आदि के आॅर्डर भी बड़ी संख्या में मिलते हैं। यह किसान स्वयं आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ 15 अन्य लोगों को भी रोजगार मुहैया करवा रहा है।

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    ऋण सुविधा का सरलीकरण किया जाए

    अजय कुमार ने बताया कि इसमें सरकार द्वारा उसे कोई सहयोग नहीं मिला है। खुद के पैसे से ही अपने कार्य को आगे बढ़ा कर आत्मनिर्भर बना है। अजय ने बताया कि कृषि व्यवसाय के साथ अन्य व्यवसाय करने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। लेकिन सरकार द्वारा ऋण सुविधाओं का लाभ लेने के लिए कई कागजी कार्रवाई करनी पड़ती है, जिससे किसान को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अगर ऋण सुविधा का सरलीकरण किया जाए तो कई किसान कृषि के साथ अन्य व्यवसाय अपना कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

    पिता के व्यवसाय को आगे बढ़ाया

    अजय कुमार चुरणियां ने बताया कि उसके पिता रोहताश कुमार ने 1996 में एक गाय खरीद कर खेती के साथ-साथ दूध बेचने का व्यवसाय शुरू किया। धीरे-धीरे गायों की संख्या बढ़ाकर 15 से ज्यादा हो गई। उसने बताया कि साल 2008 में पिता के व्यवसाय को आगे बढ़ाने का मन बनाया और दूध के प्रोडक्ट घर पर ही तैयार कर बेचने का फैसला किया।

    डेयरी फार्मिंग की राह पर चले

    अजय ने सबसे पहले शुद्ध स्वदेशी उत्पाद बनाने के लिए जानकारियां हासिल करनी शुरू की। धीरे-धीरे व्यवसाय को डेयरी फार्मिंग के रूप में आगे बढ़ाया, जिसमें दही, पनीर, रसगुल्ला, गुलाब-जामुन, आइसक्रीम, कुल्फी सहित कई प्रकार के उत्पाद तैयार करने लगा। उनके उत्पाद आस-पास के लोगों को काफी पसंद आने लगे। इसके पश्चात उसने अन्य किसानों व पशुपालकों से दूध एकत्रित कर दूध के बने उत्पाद बढ़ाने का दायरा बढ़ाया। अब हर रोज करीब 4000 लीटर दूध के उत्पाद बनाता है, जिससे उसे 5000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से कमाई होने लगी। वर्तमान में डेढ़ लाख रुपए प्रति महीना कमाई हो रही है। इसके साथ ही उसने 15 लोगों को रोजगार मुहैया करवाया है।

    भांप पर बनते हैं उत्पाद

    किसान अजय द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों की सबसे बड़ी खासियत ये हैं कि ये भांप की मदद से पकाए जाते हैं। इसके लिए बाकायदा एक बॉयलर लगाया गया है, जिसके चलते इन उत्पादों की पौष्टिकता और स्वाद भी कई गुना बढ़ जाते हैं। इसके साथ ही उनके उत्पाद पूरी आॅर्गेनिक होते हैं, जिसके चलते ये मिठाइयां कई दिनों तक खराब नहीं होती हैं। क्षेत्र के लोग विवाह-शादियों और बड़े समारोहों में अजय कुमार के उत्पादों को ही तवज्जों देते हैं। लोगों का कहना है कि यहां की मिठाइयों जैसा स्वाद शायद ही आपको और कहीं मिले।

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