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    प्रगतिशील किसान बलविंदर सिंह पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए नहीं जलाते पराली

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    प्रगतिशील किसान बलविंदर सिंह पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए नहीं जलाते पराली

    ‘मल्चिंग तकनीक’ से गेहूँ की बुआई कर खेतों में पराली का कर रहे निस्तारण

    फाजिल्का (सच कहूँ/रजनीश रवि)। धान की पराली (Paddy Straw) को खेतों में जोतकर अगली फसल लगाने के लिए किए जा रहे सफल प्रयास के तहत किसान कृषि विभाग की नई तकनीकों से खेती कर रहे हैं और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने में अह्म योगदान दे रहे हैं। पराली न जलाने वाले फाजिल्का के गांव मुंबेके के सफल प्रगतिशील किसान बलविंदर सिंह बाठ ने बताया कि वह पिछले 5-6 साल से पराली नहीं जला रहे हैं। इस बार भी उन्होंने अपनी 2 एकड़ जमीन में बिना पराली जलाए सरफेस सीडिंग-कम-मल्चिंग तकनीक से पराली को जोतकर जमीन में गाड़ दिया और गेहूं की बुआई कर दी, जो इस तकनीक से 10 किलो तक हो जाएगी। Fazilka News

    किसान ने डिप्टी कमिश्नर फाजिल्का डॉ. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग फाजिल्का के सेनु दुग्गल के निर्देशन में पराली को जलाने की बजाय इसे खाद के रुप में प्रयोग करने के प्रयासों के साथ गेहूं की सीधी बिजाई करने के लिए प्रेरित किया गया। उनका कहना है कि इससे कीमती पानी बचाया जा सकता है और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह पराली नहीं जलाते हैं और अगली फसल के लिए सतही बीजाई-सह-मल्चिंग विधि से लाते हैं, जिससे लागत भी कम आती है और फसल की पैदावार भी बढ़ जाती है।

    किसान ने बताया कि ऐसा करने से गेहूं की पैदावार भी अधिक होती है और यह गेहूं बारिश और सूखे को भी झेल सकता है। किसान ने कहा कि फसल अवशेष को बिना जलाए जमीन में दबाकर फसल लगाने से वह भूमि की उर्वरता बनाए रखने में सफल हुए हैं और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में भी योगदान दे रहे हैं। Fazilka News

    किसान ने बताया कि विभाग के अनुसार उसने प्रति एकड़ 50 किलो बीज, 60 किलो डीएपी और 25 किलो यूरिया को मल्चिंग तकनीक से सरफेस सीडर के माध्यम से मिलाया है और कृषि विभाग के अधिकारियों ने जिले के किसानों से कहा कि उन्हें इस किसान से प्रेरणा लेनी चाहिए और बिना पराली जलाए मल्चिंग तकनीक और आधुनिक उपकरणों से गेहूं की बुआई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान इस वर्ष अधिक से अधिक गेहूं की बुआई सरफेस सीडर एवं मल्चिंग तकनीक से करें। Fazilka News

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