शख्सियत: गौवंश को धूप में बैठे देखा तो लिया पौधारोपण करने का प्रण

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 3 वर्ष से कर रहा पौधारोपण

  •  धरा को हरियाली की सौगात दे रहा है सतपाल

ओढां (सच कहूँ/राजू)। अलसुबह उठते ही सर्वप्रथम 2 कि.मी की सैर करना, फिर गौशाला में गौसेवा करना और फिर अपना समय पौधों कि देखरेख कर उन्हें पानी देते हुए उनकी निराई-गुड़ाई करना। इसी कार्य को पिछले करीब 13 वर्षों से अपनी दिनचर्या में शामिल कर अपनी जिंदगी का धेय बना लिया है नुहियांवाली निवासी करीब 60 वर्षीय एक शख्स सतपाल बडजाती ने। इस बारे उक्त पर्यावरण हितैषी व्यक्ति से बातचीत कि गई तो उसने बताया कि वह एक साधन संपन्न किसान है। उसने करीब 7-8 वर्ष पूर्व अपने पुत्र को खेती का कार्यभार सौंपकर खुद को पौधारोपण व उनकी देखरेख के कार्य में लगा लिया। सतपाल की देखरेख की बदौलत सैकड़ों पौधे वृक्ष का रूप धारण कर चुके हैं।

सतपाल ने बताया कि उसकी दिनचर्या सुबह कि सैर के साथ शुरू होती है जिसके बाद वह इधर-उधर घूमने की बजाए पूरा दिन अपना समय समाजसेवा में ही बिताता है। उसने बताया कि वह गांव में स्थित गौशाला में कुछ घंटे गौसेवा में बिताने के बाद अपना पूरा समय केवल पेड़-पौधे लगाने व उनकी देखरेख करने में ही बिताता है।

सैकड़ों पौधे रोपित कर कमाया पुण्य

अलसुबह जब लोग अभी बिस्तर से भी नहीं उठते कि उस समय उक्त शख्स को जलघर, गौशाला, जोहड़ व पार्क के इर्द-गिर्द पौधे लगाते या उनकी देखभाल करते देखा जा सकता है। सतपाल के इस नि:स्वार्थ कार्य की लोग प्रशंसा किए बगैर नहीं रहते। समाजसेवी सतपाल ने सैकड़ों पौधों की देखरेख ही नहीं कि अपितु नए सैकड़ों पौधे रोपित कर ये उदाहरण प्रस्तुत किया है कि कोई व्यक्ति अगर अपने जीवनकाल में सुअवसरों पर भी पौधारोपण करे तो वह न केवल पुण्य प्राप्त कर सकता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अह्म भागीदारी निभा सकता है।

ऐसे मिली प्रेरणा

सतपाल ने बताया कि जब गांव में गौशाला का निर्माण हुआ तो उस समय वहां पर गौवंश के लिए छाया कि बड़ी समस्या थी। जिसके चलते उसने ये प्रण धार लिया कि वह पौधारोपण व उनकी देखरेख को अपनी दिनचर्या में शामिल करेगा। ताकि गौवंश के साथ-साथ आम लोगों को भी तपती गर्मी में छाया व पर्याप्त मात्रा मेंं आॅक्सीजन नसीब हो। इसके अलावा उसका पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान बना रहे। इसी धारणा को लिए सतपाल पिछले करीब 13 वर्षांे से इस कार्य में अपना योगदान देते हुए पेड़-पौधों कि देखरेख कर रहा है।

ताज्जुब कि बात तो ये है कि सतपाल ने जब से अपना समय समाजसेवी कार्यों में लगाना शुरू किया है तब से लेकर आज तक वर्षों बाद भी अपने खेती के कार्य में कोई रूचि नहीं ली और न ही कभी उसने ये पूछा कि भूमि में क्या बोया है और कितनी फसल हुई है। सतपाल ने गौसेवा, पौधे लगाना व पौधों की देखभाल करना ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है।

पौधे हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। पौधों के बिना जीवन संभव नहीं है। पौधे हमें देते ही देते हैं लेकिन लेते कुछ नहीं। सतपाल का ये प्रयास अति सराहनीय है। अगर हम विभिन्न अवसरों पर पौधारोपण करें तो एक तो पर्यावरण सरंक्षण में हमारा योगदान होगा और वो क्षण भी यादगार बनेगा। मैं पर्यावरण हितैषी सतपाल के इस जज्बे की प्रशंसा करता हूं।
– गुरप्यार सिंह, वन दरोगा

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