Precious-words

प्रभु-प्राप्ति में अंत:करण की शुद्धता जरूरी

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सरसा (सकब)। मालिक को खुश करने के लिए अंत:करण की भावना होनी चाहिए। अगर इन्सान का अंदर शुद्ध है तो बाहरी दिखावे की जरूरत नहीं होती। मालिक के प्रति तड़प, लग्न, व्याकुलता जब लग जाती है तो वो पल में दर्श-दीदार दे दिया करते हैं।

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