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    Poem: तूफा आए पर दिया बुझे नहीं

    Poem
    Poem: तूफा आए पर दिया बुझे नहीं

    हर चेहरा खिला रहे
    आशाओं का दीप जला रहे
    दिल में जज्बे की वही तान हो
    आसमां छूने की वहीं शान हो
    कह उठे दिल वही हर्ष !हर्ष! हर्ष!
    तुम आओ खुशियां लाओ
    हर बार

    नववर्ष ! नववर्ष !

    तूफा आए पर दिया बुझे नहीं
    सर झुके नहीं
    कदम रुके नहीं
    माथे पर बुलंदियों का हो सितारा
    सबको मिले रोटी
    भूख का ना हो कोई मारा
    बजे उठे शंखनाद वही
    हर्ष ! हर्ष ! हर्ष !
    तुम आओ खुशियां लाओ
    हर बार
    नववर्ष ! नववर्ष !

    भ्रूण हत्या का पाप मिटे
    रिश्वतखोरी का जाल कटे
    वैहशी पन का नाम में दम ना
    झोंपड़ियों का अंधेरा भी कम
    जल उठे दीप वही
    हर्ष ! हर्ष ! हर्ष !
    तुम आओ खुशियां लाओ
    हर बार
    नववर्ष ! नववर्ष !

    पसीने का दाम मिले
    हर शहीद को नाम मिले
    हर मजदूर को काम मिले
    थके राही को आराम मिले
    गूंज उठेगी गीत वही
    हर्ष ! हर्ष ! हर्ष ! तुम आओ खुशियां लाओ
    हर बार नववर्ष ! नववर्ष !+

    -कुलदीप स्वतंत्र