एक बार की बात है, गुरगद्दी बख्शीश से पहले पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज किसी जरूरी कार्य के लिए रेलगाड़ी से अपने गांव से बठिंडा जा रहे थे। जब रेलगाड़ी बठिंडा रेलवे स्टेशन पर पहुंची, तो उस समय भीड़ में अचानक एक बुजुर्ग महिला को दौरा पड़ गया और वह बेहोश होकर नीचे गिर पड़ी। सभी लोग रेलगाड़ी से उतर गए, लेकिन बुजुर्ग महिला की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। MSG Bhandara Month
पूजनीय परम पिता जी ने तुरंत पानी लाकर उस महिला के चेहरे पर पानी के छींटे मारे तो वह महिला होश में आ गई। उक्त बुजुर्ग महिला ने बताया कि, ‘मैं गांव बल्लुआणा की रहने वाली हूं, मुझे अपने गांव जाना है।’’ पूजनीय परम पिता जी ने अपने कार्य की परवाह न करते हुए पहले उस बुजुर्ग महिला को उसके गांव पहुंचाया। जब उक्त महिला के परिजनों को उक्त घटना के बारे में पता चला तो पूरा परिवार पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद करने लगा। इस तरह आप जी किसी मजबूर लाचार व्यक्ति की सहायता करने में रत्तीभर भी देर नहीं करते थे। परमार्थी कार्य को अपने निजी कार्य से बढ़कर महत्तता देते हुए उसे तुरंत मौके पर ही पूरा करते थे। MSG Bhandara Month















