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    भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत मूल तत्त्व संकट से निपटने में रहे हैं मददगार: वैष्णव

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    Davos भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत मूल तत्त्व संकट से निपटने में रहे हैं मददगार: वैष्णव

    दावोस (एजेंसी)। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वृहद और सूक्ष्म दोनों स्तरों पर मजबूत है और यही कारण है कि हर बार संकट से निकलने में कामयाब रहा है। वैष्णव ने यहां विश्व आर्थिक मंच की बैठक में एक परिचर्चा के दौरान यह बात कही। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क लगाने से संबंधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “हम एक अत्यंत मजबूत अर्थव्यवस्था हैं। हमारे वृहद और सूक्ष्म दोनों स्तरों के मूल तत्व बहुत मजबूत हैं, और इसी ने हमें इस अशांत दौर से निकालने में मदद की है।”

    उन्होंने कहा कि आयात शुल्क के बावजूद निर्यात बढ़ा है। उत्पादक नये बाजार तलाश रहे हैं और अपने निर्यात क्षेत्र को बढ़ा रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स अब इंजीनियर्ड गुड्स और पेट्रोलियम उत्पादों के बाद भारत से निर्यात होने वाली तीसरी सबसे बड़ी वस्तु बन गयी है जो 5-10 साल पहले तक अकल्पनीय था। मंत्री ने बताया कि भारत ने कई देशों और क्षेत्रों के साथ संतुलित, स्वस्थ और परस्पर पूरक व्यापार समझौते किए हैं। ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और दो अन्य देशों के साथ, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, आॅस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ समझौते हुए हैं। यूरोप के साथ एक और समझौता अभी प्रक्रिया में है।

    उन्होंने कहा कि तीन साल पहले इसी कमरे में “जब हमने सेमीकंडक्टर्स पर चर्चा की थी, तो लोगों को लगता था कि भारत कभी सेमीकंडक्टर निर्माण नहीं कर पायेगा”। आज पूरा सेमीकंडक्टर उद्योग मानता है कि भारत सबसे महत्वपूर्ण और विश्वसनीय वैल्यू-चेन साझेदार है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया अगले पांच साल में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में छह से आठ प्रतिशत और वर्तमान मूल्य पर आधारित नॉमिनल जीडीपी में 10-13 प्रतिशत की वृद्धि दर से भारत अगले पांच साल में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा।

    वैष्णव ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में अत्यंत परिवर्तनकारी बदलाव हुए हैं जो बहुत सुविचारित, स्पष्ट रूप से परिभाषित और अत्यंत केंद्रित क्रियान्वयन पर आधारित है। इसके चार आधार स्तंभ हैं – भौतिक, डिजिटल और सामाजिक अवसंरचना में सार्वजनिक निवेश; समावेशी विकास; विनिर्माण तथा नवाचार; और सरलीकरण। पूरे समाज को इसके लाभ दिख रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि इस समय सरकार के लिए चिंता का एक मात्र कारण मौजूद वैश्विक ऋण है जिसका विशाल हिस्सा विकसित देशों के पास है। यह आगे किस तरह का प्रभाव छोड़ेगा यह देखना होगा। उन्होंने कहा, “हमने कल जापान में बॉन्ड बेचने की होड़ देखी। यदि ऐसी घटनाएं बड़े पैमाने पर होती हैं, तो हमारे देश पर इसका क्या असर होगा, यह चिंता का विषय है। इसके अलावा, बाकी सब कुछ बहुत अच्छी स्थिति में है, और हम आने वाले वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेंगे।” देश में पुराने कानूनों और पुरानी कार्य प्रणाली की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक समय के अनुरूप कानूनी ढांचे को पुनर्गठित करने का एक बड़ा काम अभी चल रहा है। कई कानून 1950 के शुरूआती वर्षों से 1990 तक लिखे गये थे, जब सरकारें अंतरमुखी और संरक्षणवादी थीं। वे अपने नागरिकों की ऊर्जा को देखने की बजाय उसे नियंत्रित करने की कोशिश करती थीं। इसलिए अब उन कई कानूनों को फिर से लिखा जा रहा है। इसके अलावा, कई प्रक्रियागत चीजें बदली जा रही हैं। पहले एक टेलीकॉम टॉवर की अनुमति मिलने में 270 दिन लगते थे, अब सात दिन लगते हैं। रेलवे टर्मिनल को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने में पहले छह साल लगते थे, अब लगभग ढाई महीने लगते हैं।