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    इस बार की तैयारियां कागजी न हों

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    आशंका के अनुरूप कोरोना महामारी का प्रकोप फिर तेज हो गया है, लेकिन लापरवाही के जो नमूने पेश हो रहे हैं, उनकी कड़े शब्दों में निंदा होनी चाहिए। ताजा लापरवाही तो निंदनीय ही नहीं, अक्षम्य भी है। इटली से अमृतसर पहुंची एक फ्लाइट में कोरोना का विस्फोट सामने आया है। फ्लाइट में कुल 179 यात्रियों में से 125 यात्री संक्रमित पाए गए हैं। यहां ऐसी भी चर्चा हो रही है कि उनमें से कुछ लोग भाग भी गए, जिन्हें प्रशासन ढूंढ रहा है। गौर करने की बात है कि इटली दुनिया के उन शुरूआती देशों में शामिल था, जहां कोरोना ने सबसे पहले कहर बरपाया था। अभी इटली में भी कोरोना कहर बरपा रहा है। पिछले तीन दिनों से इटली में छह लाख से ज्यादा मामले आ रहे हैं, जिससे यह पता चलता है कि वहां के हालात बेहद चिंताजनक है।

    ऐसे में, वहां से भारत के लिए हवाई सेवा को कैसे मंजूरी दी जा सकती है? साफ है, इटली में विमान यात्रा से पहले यात्रियों को जांच से नहीं गुजरना पड़ा है। वह तो भला हो कि अमृतसर में यात्रियों के उतरते ही जांच हुई और सभी को क्वारंटीन कर दिया गया। वहीं भारत के हालातों पर नजर डालें तो शुक्रवार को एक लाख 41 हजार के लगभग मामले सामने आए और 285 लोगों की मौत हुई। गनीमत है कि अभी जान गंवाने वालों की संख्या ज्यादा नहीं है और हर प्रकार से कोशिश करनी चाहिए कि स्थितियां दूसरी लहर जैसी न हों। मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन अस्पतालों पर अभी दबाव नहीं है। केंद्र सरकार भी राज्य सरकारों को लगातार निर्देशित कर रही है, विशेषज्ञों की सलाह पर चलना समय की मांग है। सबके मन में यही सवाल है कि आखिर किस सीमा तक जाएगी महामारी? एक अनुमान है कि जनवरी के अंत में कोरोना मामले चरम पर होंगे।

    ऐसे में वैज्ञानिकों के अलग-अलग अपने अनुमान सामने आ रहे हैं, जिनको लेकर दुविधा का माहौल भी बना हुआ है। कहीं लॉकडाउन न लग जाए, इस चिंता में मजदूरों का पलायन शुरू हो गया। पहले की तमाम गलतियों को ध्यान में रखते हुए चलना होगा। जगह-जगह लॉकडाउन की कमोबेश वापसी होने लगी है। संपूर्ण लॉकडाउन लगाने से ज्यादा जरूरी है कि पहली व दूसरी लहर से सबक लेकर स्वास्थ्य व बचाव योजनाओं का सही क्रियान्यन हो। इंतजाम केवल कागजी न रहें, बिस्तर, आॅक्सीजन व जरूरी दवाइयों का अभाव न हो। पिछली लहर के समय डॉक्टर व समाजसेवी तो जी-जान से लगे हुए थे, पर राजनीतिक कार्यकतार्ओं व नेताओं को महामारी से जूझते कम देखा गया था। इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए। महामारी के समय किसी भी तरह की कमी या अपराध को रोकना जन-प्रतिनिधियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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