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    कैथल जिले के हरविंद्र बुलंद हौसले के साथ पैरालंपिक में गोल्ड जीत रचा इतिहास

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    Kaithal News: कैथल जिले के हरविंद्र बुलंद हौसले के साथ पैरालंपिक में गोल्ड जीत रचा इतिहास

    डेढ़ साल की उम्र में पैरों ने काम करना बंद किया | Kaithal News

    कैथल (सच कहूं/कुलदीप नैन)। Kaithal News: जी हां, इस कहावत को सच कर दिखाया है कैथल जिले के हरविंद्र ने। पेरिस में चल रहे पैरालिंपिक-2024 में जिले के अजित नगर गांव के हरिवंद्र ने इतिहास रचते हुए जिले का नाम रोशन किया है। तीरंदाजी के पुरुष रिकर्व ओपन (व्यक्तिगत) का एकतरफा फाइनल मुकाबला जीत कर गोल्ड मेडल हासिल किया है। इस दौरान हरविंद्र ने पोलैंड के तीरंदाज लुकाज सीजैक को 6-0 को शिकस्त देकर इतिहास रचा। इससे पहले भारत का कोई भी तीरंदाज पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल नहीं जीत पाया है। Kaithal News

    ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला हरविंद्र पहला तीरंदाज बन गया है। सेमिफाइनल मुकाबले में हरिवंद्र ने ईरान के तीरंदाज मोहम्मद रिजा अरब अमेरी को कुल 5 सेट के मुकाबले में 7-3 के अंतर से शिकस्त दी। हरविंद्र के पदक जीतने पर जिले में खुशी का माहौल है। हरविंद्र के गांव अजितनगर में उनके घर पर बधाई देने वालो का तांता दो दिन से लगातार लगा हुआ है।

    संघर्षों से भरा है हरविंद्र का जीवन | Kaithal News

    पेरिस पैरालंपिक में पुरुष रिकर्व के फाइनल में गोल्ड मेडल जीतने वाले हरियाणा के 33 साल के तीरंदाज हरविंदर सिंह ने यहां तक पहुंचने के लिए अपने जीवन में काफी संघर्ष व चुनौतियों का सामना किया है।

    25 फरवरी 1991 को हरियाणा के जिला कैथल के अजीत नगर में जन्मे हरविंदर सिंह के पैरों ने मात्र डेढ़ साल की आयु में ही काम करना बंद कर दिया था। दरअसल उन्हें डेंगू हो गया था और इलाज के दौरान लगाए इंजेक्शनों के कुप्रभाव से उनके दोनों पैरों ने अपनी गतिशीलता खो दी थी। लेकिन इस बड़े झटके के बावजूद हरविंदर सिंह ने हौसला नहीं खोया। ऊपर से परिवार वालों ने भी हमेशा साथ दिया। 2012 लंदन पैरालंपिक से प्रेरणा लेकर हरविंदर सिंह में तीरंदाजी का जुनून पैदा हुआ। इसके बाद उन्होंने तीरंदाजी के लिए सिखलाई लेनी शुरू की। हालांकि इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा, लेकिन हरविंदर ने हार नहीं मानी। Kaithal News

    कोरोना काल में ट्रेनिंग के लिए पिता ने अपने खेत को ही आर्चरी रेंज में बदल दिया था

    2017 में पैरा आर्चरी वर्ल्ड चैंपियनशिप से उन्होंने अपने कॅरिअर की शुरुआत की। इस मुकाबले में वह सातवें स्थान पर रहे थे, लेकिन अगले ही साल 2018 में जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में हरविंदर सिंह ने गोल्ड मेडल जीता। कोरोना काल के दौरान बेटे की ट्रेनिंग प्रभावित न हो, इसलिए पिता ने हरविंदर सिंह के लिए अपने खेत को ही आर्चरी रेंज में तबदील कर दिया था।

    तीन साल पहले हरविंदर ने टोक्यो पैरालंपिक में भारत के लिए तीरंदाजी में पहला पदक हासिल करके इतिहास रचा था। हरविंदर सिंह ने कांस्य पदक प्राप्त किया था। अब पेरिस में पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीत कर हरविंदर सिंह ने एक और इतिहास कायम कर दिया है। उनकी इस सफलता पर पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में खुशी का माहौल है। अर्थशास्त्र विभाग से वह पीएचडी कर रहे हैं। Kaithal News

    कोच सुरिंदर सिंह रंधावा ने खुशी व्यक्त करते कहा कि हरविंदर सिंह बहुत ही प्रतिभावान व मेहनती खिलाड़ी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह भविष्य में और बड़ी सफलताओं को हासिल करेंगे। यूनिवर्सिटी के वीसी केके यादव, खेल
    विभाग की डायरेक्टर प्रोफेसर अजीता ने भी हरविंदर सिंह को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी को अपने ऐसे होनहार खिलाड़ियों पर हमेशा गर्व रहेगा। साथ ही कहा कि पीयू अकादमिक क्षेत्र के साथ-साथ खेलों के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका अदा कर रहा है।

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