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Thursday, April 16, 2026
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    बाढ़ मुआवजे पर केंद्र-पंजाब में टकराव, पांच बार भेजा पत्र, केंद्र ने किया अस्वीकार

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    Chandigarh News: बाढ़ मुआवजे पर केंद्र-पंजाब में टकराव, पांच बार भेजा पत्र, केंद्र ने किया अस्वीकार

    गृह मंत्रालय ने उठाए सवाल- नियमों के अनुसार रिपोर्ट क्यों नहीं भेज रही पंजाब सरकार

    चंडीगढ़ (सच कहूँ/अश्वनी चावला)। Chandigarh News: अगस्त 2025 में आए भीषण बाढ़ के बाद भी पंजाब को अब तक अपेक्षित राहत नहीं मिल पाई है। केंद्र और पंजाब सरकार के बीच मुआवजे को लेकर जारी विवाद के कारण करोड़ों रुपये की सहायता राशि अटकी हुई है, जिससे आम लोगों को राहत मिलने में देरी हो रही है। पंजाब सरकार द्वारा बाढ़ से हुए नुकसान की रिपोर्ट कई बार केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार ने हर बार उसे खारिज करते हुए प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के नियमों के अनुसार संशोधित रिपोर्ट भेजने को कहा है। Chandigarh News

    केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 27 अक्टूबर 2025 से लेकर 9 मार्च 2026 तक पांच बार पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई है। गृह मंत्रालय ने अपने पत्रों में स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार के अधिकारी एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के निर्धारित मानकों के अनुरूप रिपोर्ट तैयार नहीं कर रहे हैं। इस कारण केंद्र सरकार अंतिम निर्णय लेने और राहत राशि जारी करने में असमर्थ है। जानकारी के अनुसार, अगस्त 2025 के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आए पानी के कारण पंजाब में ऐतिहासिक बाढ़ आई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य को प्राकृतिक आपदा प्रभावित घोषित किया गया था और सेना व केंद्रीय राहत टीमों को भी तैनात किया गया था।

    13 हजार करोड़ के नुकसान का दावा | Chandigarh News

    पंजाब सरकार ने बाढ़ से लगभग 13 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन कर केंद्र को रिपोर्ट भेजी थी। हालांकि, केंद्र ने इस रिपोर्ट को नियमों के अनुरूप न मानते हुए संशोधन की मांग की और इसके बाद लगातार कई बार पत्राचार किया गया। केंद्र सरकार का कहना है कि पंजाब द्वारा भेजी जा रही रिपोर्ट में नुकसान का आकलन बाजार दरों के आधार पर किया जा रहा है, जबकि मुआवजा एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के तय मानकों के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए।

    केंद्र ने बताया कि बाढ़ में टूटी एक सड़क के लिए पंजाब सरकार ने 25 लाख रुपए का अनुमान लगाया, जबकि केंद्र ने नियमों के आधार पर इससे कहीं कम राशि तय की। इसी कारण दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है और राहत राशि जारी होने में लगातार देरी हो रही है। इसका सीधा असर बाढ़ प्रभावित लोगों पर पड़ रहा है, जिन्हें अब तक पूरी सहायता नहीं मिल सकी है।

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