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    100 Rupees Coin: देख लो 100 रुपये के नए सिक्के, मुद्रा पर भारत माता की तस्वीर

    100 Rupees Coin
    100 Rupees Coin: देख लो 100 रुपये के नए सिक्के, मुद्रा पर भारत माता की तस्वीर

    100 Rupees Coin: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष रूप से डिजाइन किए गए डाक टिकट और 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया। इस अवसर पर सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मौजूद थीं।

    राष्ट्रीय राजधानी के डॉ. अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में संघ के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि केशव बलीराम हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में संघ की स्थापना की। संघ अपने सामाजिक और सेवा कार्यों के लिए के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत, और सामाजिक सेवा में कई योगदान दिया है। आज जारी स्मारक टिकट और सिक्का इन्हीं योगदानों का प्रतीक है।

    मोदी ने कहा कि विशेष जारी डाक टिकट और स्मृति सिक्के पर एक ओर राष्ट्रीय चिह्न है और दूसरी ओर सिंह के साथ वरद् मुद्रा में भारत माता की भव्य छवि और समर्पण भाव से उसे नमन करते स्वयंसेवक दिखाई देते हैं। भारतीय मुद्रा पर भारत माता की तस्वीर संभवत स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। मोदी ने कहा कि 1963 में संघ के स्वयंसेवकों ने 26 जनवरी की राष्ट्रीय परेड में शामिल हुए थे और आन बान शान से राष्ट्रभक्ति की धुन पर कदमताल किया था। उन्होंने कहा कि संघ को मुख्य धारा में आने से रोकने का अनगिनत प्रयास हुए, गुरु गोलवरकर को झूठे मामले में फंसाया गया उन्हें जेल तक भेज दिया लेकिन जब गुरु गोलवरकर बाहर आए, उन्होंने सहज रूप से बिना कटुता के समाज सेवा में जुट गए।

    उन्होंने कहा कि चाहे संघ पर प्रतिबंध लगे चाहे षडयंत्र हुए संघ के स्वयंसेवकों ने कभी कटुता को स्थान नहीं दिया क्योंकि वो जानते हैं कि हम समाज से अलग नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वयंसेवक को लोकतंत्र और संवैधानिक संस्था में विश्वास, जब देश में आपातकाल थोपी गई तभी इस विश्वास ने स्वयंसेवकों को आगे बढ़ाया, समाज के अनेक थपेड़े झेलते हुए भी संघ आज तक विराट वट वृक्ष की तरह अडिग खड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शताब्दी वर्ष पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कोई संयोग नहीं था। यह हजारों सालों से चली आ रही परंपरा का पुर्नउत्थान था। इस युग में संघ उसी अनादि राष्ट्रचेतना का पुण्य अवतार है।