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Sunday, March 1, 2026
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    Job Growth in India: ट्रंप के एच-1बी वीज़ा पर सख्ती के चलते वॉल स्ट्रीट ने बढ़ाईं भारत में भर्तियाँ : रिपोर्ट

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आव्रजन नियमों को कठोर किए जाने तथा एच-1बी वीज़ा शुल्क में भारी बढ़ोतरी के बाद, वॉल स्ट्रीट की कंपनियाँ अब पहले से अधिक अपने भारत स्थित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पर निर्भर होती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नीतिगत बदलावों के चलते अमेरिकी वित्तीय संस्थान भारत में अपने बैक-ऑफिस और तकनीकी इकाइयों का विस्तार तेज़ी से करेंगे, क्योंकि यहाँ उच्च कौशल वाले पेशेवरों की बड़ी उपलब्धता और अपेक्षाकृत कम लागत एक बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करती है। Job Growth in India

    कई बड़ी कंपनियाँ पहले ही अपने भारत स्थित केंद्रों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में जुट गई हैं। जेपी मॉर्गन चेज़ बेंगलुरु में अनुबंधों की निगरानी के लिए क्रेडिट सपोर्ट विशेषज्ञों की तलाश कर रहा है, जबकि गोल्डमैन सैक्स ऋण मूल्यांकन के लिए नए सहयोगियों की भर्ती कर रहा है। इसी प्रकार, केकेआर एंड कंपनी अपनी पोर्टफोलियो इकाइयों का विश्लेषण करने के लिए टीम बढ़ा रहा है तथा मिलेनियम मैनेजमेंट एलएलसी अपनी डेरिवेटिव ट्रेडिंग इकाई के लिए जोखिम विश्लेषकों की नियुक्ति कर रहा है।

    भारत लंबे समय से विश्व के प्रमुख तकनीकी प्रतिभा केंद्रों में शामिल रहा है। ग्लोबल टेक मार्केट्स: टॉप टैलेंट लोकेशन्स 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भारत, चीन और जापान उन चुनिंदा देशों में हैं जिनके कई शहर वैश्विक शीर्ष 10 में स्थान रखते हैं।

    कंपनियों की रणनीति में बदलाव | Job Growth in India

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में स्थित दो अमेरिकी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी अपने मुख्यालयों के साथ मिलकर जीसीसी का और विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। कुछ संस्थान अमेरिका में दिए गए जॉब ऑफ़र रद्द कर भारत में वैकल्पिक पद सृजित करने पर भी विचार कर रहे हैं।

    ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी वीज़ा आवेदन पर लगाए गए नए 100,000 डॉलर के शुल्क ने वैश्विक कंपनियों को झकझोर दिया है। जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डाइमॉन ने स्वयं कहा कि इस निर्णय ने “कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया”।

    उच्च शुल्क के कारण कई कंपनियाँ यह सोचने पर मजबूर हैं कि वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञों की नौकरियाँ अमेरिका में रखना लाभकारी होगा या भारत में जीसीसी के माध्यम से संचालित करना अधिक उचित रहेगा।

    भारत की ओर रुझान तेज़ क्यों? | Job Growth in India

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान महज़ वीज़ा नियमों के कारण नहीं है, बल्कि भारत अब केवल “कम लागत वाले श्रम केंद्र” की छवि से आगे बढ़ चुका है। यहाँ गहरी तकनीकी विशेषज्ञता, उच्च-स्तरीय कार्य-कुशलता और बड़े पैमाने पर उपलब्ध प्रतिभाएँ मल्टीनेशनल कंपनियों को आकर्षित कर रही हैं।

    1990 के दशक में बैक-ऑफिस के रूप में शुरू हुए ये केंद्र आज वैश्विक वित्तीय परिचालन के रणनीतिक हिस्से बन चुके हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई और गुरुग्राम में स्थित विशाल परिसरों में अब जोखिम विश्लेषण, क्वांट मॉडलिंग, निवेश विश्लेषण, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और उच्च-स्तरीय तकनीकी परियोजनाओं पर कार्य किया जाता है।

    आज स्थिति यह है कि अमेरिका के शीर्ष छह बैंक भारत स्थित जीसीसी में लगभग 1.5 लाख कर्मचारियों को रोजगार दे रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली की भारत में टीमों का आकार अब अमेरिका के बाहर किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे बड़ा है।

    भारत में नौकरी करना क्यों फायदेमंद? | Job Growth in India

    अमेरिकी केंद्रों की तुलना में भारतीय कर्मचारियों को कम वेतन देना कंपनियों के लिए लागत बचत का बड़ा जरिया है। भारत में जीसीसी में नई शुरुआत करने वाले इंजीनियरिंग स्नातक सालाना 3 से 8 लाख रुपए तक कमा सकते हैं, जबकि अमेरिका में इन्हीं पदों पर वेतन 60,000 से 120,000 डॉलर तक होता है।

    साथ ही भारत में प्रतिभाओं का विशाल पूल लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में गोल्डमैन सैक्स ने बेंगलुरु में 38 कर्मचारियों को मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर पदोन्नत किया, जो न्यूयॉर्क और लंदन के बाद सबसे बड़ी संख्या है। बरकलेज इंडिया के सीईओ प्रमोद कुमार के अनुसार, “भारत बैंकिंग क्षेत्र के लिए जीसीसी विस्तार का प्रमुख वैश्विक केंद्र बन चुका है और आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति और भी तेज़ होगी।” Job Growth in India