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    Heart Attack: स्पेन में साइकिल से डिलीवरी जाते समय आया हार्ट अटैक, कैमला के युवक की मौत

    Gharaunda
    Gharaunda: स्पेन में साइकिल से डिलीवरी जाते समय आया हार्ट अटैक, कैमला के युवक की मौत

    तीन महीने पहले पत्नी के साथ विदेश गया था, परिवार ने जमीन बेचकर भेजा था

    घरौंडा (सच कहूँ न्यूज़)। Gharaunda: स्पेन के बार्सिलोना में कैमला गांव के एक युवक की मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। युवक फूड डिलीवरी का काम करता था और अपनी साईकिल पर डिलीवरी देने के लिए जा रहा था। पहाड़ी रास्ते पर चढ़ाई के दौरान उसे घबराहट हुई और वह सड़क पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद की और उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसकी जान नहीं बच सकी। फिलहाल पार्थिव शरीर अस्पताल में रखा गया है और भारत लाने की प्रक्रिया चल रही है।

    गांव कैमला के मुकेश कुमार पुत्र देवी सिंह करीब तीन महीने पहले अपनी पत्नी सपना के साथ टूरिस्ट वीजा पर स्पेन गया था। शुरूआत में उसने एक स्टोर पर काम किया, लेकिन वहां से जॉब छोड़कर फूड डिलीवरी का काम शुरू किया। पिता देवी सिंह ने बताया कि मुकेश साइकिल से एक डिलीवरी लेकर ऊंचाई वाले इलाके की ओर जा रहा था। चढ़ाई के दौरान उसे घबराहट हुई और वे साइकिल से गिर पड़े। वहीं बेहोश हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत एंबुलेंस बुलवाई और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। Gharaunda

    परिवार को मिली जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने बताया कि चढ़ाई वाले रास्ते पर अत्यधिक थकान और घबराहट के कारण उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया। परिजनों ने बताया कि मुकेश कुमार करीब तीन महीने पहले अपनी पत्नी सपना के साथ भारत से स्पेन गया था। शुरुआत में वह वहां एक स्टोर पर नौकरी कर रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद वह नौकरी छूट गई। इसके बाद उन्होंने एक रेस्टोरेंट के माध्यम से फूड डिलीवरी का काम शुरू किया। इसी काम से दोनों अपना रोजमर्रा का खर्च चला रहे थे। पत्नी सपना भी उसी रेस्टोरेंट में काम करती हैं और फिलहाल वही बार्सिलोना में मौजूद हैं।

    मुकेश के पिता देवी सिंह मधुबन के अर्पणा अस्पताल में सुपरवाइजर है। देवी सिंह ने बताया कि बेटे की शादी करीब डेढ़ साल पहले कोर्ट में हुई थी। मुकेश शुरू से ही विदेश जाकर परिवार की आर्थिक हालत सुधारना चाहता था। इसके लिए परिवार ने जमीन बेचकर उसे टूरिस्ट वीजा पर विदेश भेजा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 20 लाख रुपए खर्च हुए। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। परिवार के अनुसार, मुकेश व उसकी पत्नी 16 या 17 अक्तूबर को विदेश गए थे। वहां वह लेबर वर्क और डिलीवरी जैसे काम कर रहे थे। गांव में बड़ा भाई रहता है और वह शादीशुदा है। घर की आर्थिक जिम्मेदारी में मुकेश की बड़ी भूमिका थी। परिजनों का कहना है कि वही परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद था, लेकिन उनके असामयिक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    परिजनों ने बताया कि पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए कागजी प्रक्रिया और भारी खर्च की जरूरत है, जो बिना मदद के संभव नहीं हो पा रहा। परिवार ने समाज और दानवीर सज्जनों से अपील की है कि इस दुख की घड़ी में सहयोग किया जाए, ताकि पार्थिव शरीर को भारत लाया जा सके। Gharaunda

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