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Sunday, March 1, 2026
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    ट्रम्प की धमकी से ईरान व अमेरिका में टकराव

    Iran and the US collide

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने युद्ध लड़ने की बात कही तब ईरान का अंत हो जाएगा। ट्रम्प का यह बयान अत्यंत उत्साही, सिद्धांतहीन, धमकी भरा व शांति के प्रति गैर-जिम्मेदाराना है। ट्रम्प ने गत दिवस यह भी कहा था कि युद्ध होने पर ईरान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा। ऐसा ब्यान संयुक्त राष्ट्र या मानववादी विचारधारा का हिस्सा नहीं। सैनिक कार्यवाही का उद्देश्य विरोधियों की हथियारबंद सेना के साथ टक्कर लेना होता है न कि आम जनता को मौत के घाट उतारना। सैनिक बलों का प्रयोग भी आम जनता का बचाव करने के लिए किया जाता है और युद्ध को टालने का प्रयास किया जाता है। सैनिक बलों का प्रयोग दबाव बनाने के लिए भी किया जाता है।

    ट्रम्प जिस प्रकार की भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं वह ईरान प्रशासन की अपेक्षा ज्यादा ईरान के नागरिकों को धमका रहे हैं। किसी देश या उसके किसी विशेष हिस्से पर कार्यवाही भी प्रभावशाली होती है जिसका उद्देश्य आम जनता को नुक्सान से बचाना होता है। भारत ने आतंकवाद के खात्मे के लिए पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राईक की थी, जिसका उद्देश्य किसी देश के कुछ सीमित हिस्से पर कार्यवाही करना होता है ताकि आम जनता का नुक्सान न हो। ईरान सरकार की जिद्द सही है या गलत, यह अलग मामला है लेकिन ट्रम्प जैसे नेता का युद्ध को लेकर धड़ाधड़ बयानबाजी करना विश्व की परिस्थितियों के अनुकूल नहीं। विशेष तौर पर उन परिस्थितियों में जब इस्लाम के नाम पर युद्ध का ऐलान हो।

    आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध है लेकिन आतंकवाद से निपटने के लिए आतंकवाद व धर्म को जोड़कर देखने के प्रयास भी नहीं होने चाहिए। ट्रंप जिस तरह से बयानबाजी कर रहे हैं, उसका फायदा आतंकवादी संगठन उठा सकते है और वह ट्रम्प को इस्लाम विरोधी घोषित कर मुस्लिम देशों को अमेरिका के खिलाफ एकजुट कर सकते हैं। दरअसल डोनाल्ड ट्रम्प के स्वभाव में गर्मी व जल्दबाजी अंतरराष्ट्रीय स्तर की समस्याएं सुलझाने के समर्थ नहीं है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी पाकिस्तान में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को उसके घर में घुसकर मारा था लेकिन वह उचित कार्रवाई थी। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़े बिना ही लादेन का काम तमाम कर दिया। ईरान के परमाणु हथियारों का मुद्दा संवेदनशील है लेकिन इस मुद्दे पर काम करने के लिए विश्व को युद्ध की आग में झोंकने की गलती से बचा जाना चाहिए।

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