हमसे जुड़े

Follow us

29.2 C
Chandigarh
Thursday, April 16, 2026
More
    Home विचार प्रेरणास्रोत लाल बहादुर शा...

    लाल बहादुर शास्त्री की सादगी

    Lal-Bahadur-Shastri
    Lal-Bahadur-Shastri
    राष्ट्रमंडलीय प्रधानमंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को लंदन जाना था। उनके पास कोट दो ही थे। उनमें से एक में काफी बड़ा छेद हो गया था। शस्त्री जी के निजी सचिव वेंकटरमण ने उनसे नया कोट सिला लेने का आग्रह किया, पर शास्त्री जी ने इनकार कर दिया। फिर भी वेेंकटरमण कपड़ा खरीद ही लाए और दर्जी को बुला लिया। जब कोट का नाप लिया जाने लगा तो शास्त्री जी हँसे और बोले, ‘‘इस समय तो इसी पुराने कोट को पलटवा लो। ठीक नहीं जमा तो दूसरा सिलवा लूँगा।’’ जब कोट दर्जी के यहाँ से आया तो कोट की मरम्मत का पता ही नहीं चला। तब शास्त्री जी ने कहा,‘‘जब कोट की मरम्मत का हमें पता नहीं चल रहा है, तो सम्मेलन में भाग लेने वाले भला क्या पहचानेंगे।’’ और वह उसी कोट को पहनकर लंदन ‘राष्ट्रमंडलीय सम्मेलन’ में भाग लेने के लिए गए। ऐसी थी शास्त्री जी की सादगी। यह वृत्ति राष्ट्र को अपना एक परिवार मानने व स्वयं को उसका एक अभिन्न अंग मानने के कारण विकसित होती है। क्षुद्र व्यक्ति इसे कृपणता समझ सकते हैं। पर सत्य यही है कि इस सादगी में अपव्यय की रोकथाम तोे ही महानता के बीज छिपे पड़े हैं।

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।