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Wednesday, April 22, 2026
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    नेपाल के तेवर अचानक नहीं बदले

    Nepal

    भारत के दो पड़ोसी देश नेपाल और चीन के साथ विगत कई दिनों से सीमा विवाद चल रहा है। एक तरफ चीन लद्दाख से लगी सीमा पर अपनी फौज तैनात कर रहा है तो वहीं नेपाल ने भी सीमा पर स्थित कुछ जगहों को अपने नक्शे में दर्शाया है। नेपाल की संसद के निचले सदन ने एकमत से नेपाल के नए राजनीतिक नक्शे को पारित कर दिया है, जिसमें लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को नेपाल की सीमा का हिस्सा दिखाया गया है। नेपाल की कैबिनेट ने इसे अपना जायज दावा करार देते हुए कहा कि महाकाली (शारदा) नदी का स्रोत दरअसल लिम्पियाधुरा ही है जो फिलहाल भारत के उत्तराखंड का हिस्सा है।

    पिछले कुछ वर्षों से नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना अधिकार जता रहा था, लेकिन यह केवल शाब्दिक तौर पर सीमित था। इस विवाद में भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने यह कहकर भरोसा दिया है कि भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी के संबंध हैं, लेकिन अब यह मामला जज्बातों से थमने वाला नहीं। नेपाल-भारत के अतीत में रिश्ते बेहद सुदृढ़ व मजबूत रहे हैं। नेपाल ही एकमात्र ऐसा पड़ोसी देश है जहां दोनों देशों के लोग एक-दूसरे की सीमा में आ-जा सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों से जैसे ही चीन ने लद्दाख में भारतीय क्षेत्रों में घुसपैठ की तब नेपाल ने भारत के प्रति अपना रवैया बदलना शुरू कर दिया। 6 मई को चीनी सैनिकों ने लद्दाख में दोबारा लाईन आफ एक्चुअल कंट्रोल पार की।

    भले ही भारत-चीन ने मामला एक बार शांत कर लिया है, इसके छह दिन बाद नेपाल ने अपनी संसद में नया नक्शा पास कर दिया। उनकी मंशा स्पष्ट है कि नेपाल के तेवर तब ही बदलते हैं जब चीन और भारत का सीमा विवाद तूल पकड़ता है। दरअसल नेपाल-चीन के साथ गहरी दोस्ती बना चुका है और अब वह चीन के इशारे पर किसी भी वक्त भारत के साथ अपने संबंधों को बिगाड़ सकता है। भारत के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी यह है कि पूर्व की तरफ पाकिस्तान है। हालांकि भारत की कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय स्थिति नेपाल के आगे घुटने टेकने वाली नहीं है, दूसरी ओर नेपाल में राजनीतिक जगत का बड़ा हिस्सा चीन भक्त हो रहा है।

    यदि कोई नेपाली सांसद भूलवश भी भारत के पक्ष की बात करता है तब उसके घर पर हमला हो जाता है और प्रदर्शनकारी उसे देश छोड़ने के लिए कहते हैं। भारत के लिए नेपाल को आसानी से साधने के दावे वास्तविक नहीं हैं, यह भारत के लिए एक नई मुसीबत है जिससे निपटने के लिए ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है।

     

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