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    आओ जनाब आपको, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली ले चलूं

    Migrant Workers sachkahoon

    अपने खर्चे पर प्रवासी मजदूरों को बुलाया जा रहा पंजाब-हरियाणा

    • बिहार से रोजाना 15 से 20 बसें पहुंच रही हरियाणा-पंजाब, दिल्ली

    चंडीगढ़ (सच कहूँ/अनिल कक्कड़)। लॉकडाउन में सबसे ज्यादा मुसीबत किसी ने झेली वो यूपी-बिहार के प्रवासी मजदूर थे। जो अचानक से काम बंद होने के चलते अपने परिवार सहित कई कई हजार किलोमीटर पैदल ही अपने गाँवों लौटते दिखे। सरकार और अपने मालिकों की बेरुखी को अब पीछे छोड़ प्रवासी मजदूरों की चांदी फिर से लौट आई है। हरियाणा-पंजाब के किसान आंदोलन के चलते खेतों को समय नहीं दे पा रहे इसलिए अपने खर्च पर बिहार, यूपी और नेपाल से मजदूरों को लाया जा रहा है। बता दें कि किसान आंदोलन के कारण हरियाणा और पंजाब में मजदूरों की कमी हो गई है। वहीं दिल्ली में भी लेबर की जरूरत के चलते लेबर बुलाई जा रही है। इसी के साथ अब खेतों में धान की कटाई नजदीक होने, कुछ नरमें की चुगाई और मंडियों में काम के लिए पंजाब और हरियाणा के किसान बिहार और उत्तर प्रदेश गए मजदूरों को बसें भेजकर वापस बुलाना शुरू कर दिया है। वहीं बिहार से इन मजदूरों को लाने में एक बस का खर्चा एक लाख से ज्यादा का पड़ रहा है।

    कोरोना टैस्ट भी करवा रहे किसान

    जानकारी के अनुसार किसान मजदूरों को अपने निजी खर्चे पर बुला तो रहे ही हैं साथ में कोरोना टेस्ट भी करवा रहे हैं। बता दें कि पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली में कृषि कानून बिल के विरोध में प्रदर्शन में व्यस्त हैं। ऐसे में वहां की खेती प्रभावित हो रही है। इसी के चलते अब बिहार, यूपी और नेपाल से मजदूरों को विशेषतौर पंजाब और हरियाणा में लाया जा रहा है। बठिंडा के किसान तजिंदरपाल सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के चलते पिछले साल भी उनकी लेबर नहीं आई थी, ये फिक्स लेबर होती है जो हर फसल पर उनके यहां कटाई, बुआई के लिए आती है। पिछली बार लॉकडाउन के चलते दिक्कत हुई थी। लेकिन इस बार लेबर लौट रही है क्योंकि फसल की कटाई नजदीक है। आपको बता दें कि अकेले पंजाब में इस दफे 25 लाख हैक्टेयर से ज्यादा धान और 5 लाख हैक्टेयर से ज्यादा बासमती की रोपाई हुई है।

    एजेंटों के द्वारा आ रहे मजदूर

    सीतापुर के मजदूर रामबिस्वास के अनुसार स्थानीय एजेंट ने उन्हें 15 हजार रुपए प्रति महीना और रहना-खाना साथ में, का ऑफर दिया था, जिसके बाद उनके परिवार से 9 लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, पंजाब में धान कटाई के लिए आ रहे हैं। आपको बता दें कि बिहार में अब मजदूरों को हरियाणा-पंजाब भेजने के लिए ऐजेंट घूम रहे हैं। इनकी संख्या 100 से ज्यादा बताई जा रही है। ये लोग अपना ऑफिस खोल कर बैठे हैं और मजदूरों को पंजाब, हरियाणा भेज रहे हैं। एक एजेंट ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उन्हें पंजाब और हरियाणा में बैठे उनके साथियों से लेबर की डिमांड पता चलती है और वे यहां लोगों को ऑफर देते हैं, जिसके बाद स्थानीय लेबर को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली भेजा जाता है। बताया जा रहा है कि बिहार के मधुबनी, सीतामढ़ी, छपरा, पूर्णिया, मोतिहारी सहित अन्य जगहों के अलावा उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, मिर्जापुर, जौनपुर सहित अन्य जिलों से मजदूरों को लाया जा रहा है। रोजाना 15 से 20 बसें पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के लिए मजदूरों को लेकर रवाना हो रही हैं।

    स्थानीय मजदूरों की आर्थिक स्थिति पर फर्क पड़ता है लेकिन रोजगार सभी को चाहिए: सेवेवाला

    वहीं इस विषय पर सच कहूँ से बातचीत में पंजाब खेत मजदूर यूनियन के राज्य जनरल सचिव लछमण सिंह सेवेवाला ने कहा कि बिल्कुल प्रवासी लेबर के आने से स्थानीय लेबर की डिमांड कम होती है और लेबर रेट पर भी फर्क पड़ता है, लेकिन प्रवासी मजदूर भी मजबूरी में इतनी दूर लेबर करने आते हैं, उनकी आर्थिक स्थिति हमारे से भी खराब है और वे यहां भी लूट का शिकार होते हैं। दरअसल यहां के मजदूरों का प्रवासी मजदूरों से कोई झगड़ा नहीं है, अगर किसी का दोष है तो सरकारी नीतियों का है, जिसमें मजदूर बिल्कुल हाशिए पर हैं।

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