International Women’s Day: हनुमानगढ़ (सच कहूँ/हरदीप सिंह)। ग्रामीण भारत में महिला नेतृत्व की ताकत किस तरह बदलाव की नई कहानी लिख सकती है, इसका जीवंत उदाहरण हनुमानगढ़ जिले की श्रीनगर ग्राम पंचायत की प्रशासक (सरपंच) नवनीत संधू हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनकी कार्यशैली और पहलें यह दर्शाती हैं कि जब महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिलता है तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत धुरी बन सकती हैं। Hanumangarh News
नवनीत संधू ने आत्मविश्वास, साहस और समर्पण के साथ पंचायत का नेतृत्व करते हुए विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। घग्घर नदी में उफान के दौरान जब पंचायत क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई, तब उन्होंने स्वयं ट्रैक्टर चलाकर गांव के तटबंधों को मजबूत किया और राहत कार्यों की अगुवाई की। उनके इस साहसिक कदम ने ग्रामीणों में विश्वास पैदा किया और संकट की घड़ी में महिला नेतृत्व की ताकत को उजागर किया।

मियावाकी तकनीक से बनाया ‘मिनी जंगल’
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नवनीत संधू ने एक अभिनव पहल करते हुए श्रीनगर ग्राम पंचायत में मियावाकी तकनीक से पहला मिनी जंगल विकसित किया। इस अभियान के तहत उन्होंने छोटे-छोटे सघन जंगल तैयार किए, जिन्हें वे ‘ऑक्सीजन बैंक’ कहती हैं। इस पहल से न केवल गांव में हरियाली बढ़ रही है, बल्कि आसपास की लगभग 50 पंचायतें भी इस मॉडल से प्रेरित होकर वनरोपण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
युवाओं को नशामुक्ति की राह पर लाने का प्रयास | Hanumangarh News
गांव में बढ़ती नशे की समस्या को देखते हुए उन्होंने युवाओं को जागरूक करने और नशे से दूर रखने के लिए अभियान चलाया। हथकढ़ शराब और रासायनिक नशे के खिलाफ चलाए गए इस अभियान से युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए शुरू किया स्टडी सेंटर
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने पहल करते हुए ग्राम पंचायत में नि:शुल्क लाइब्रेरी एवं स्टडी सेंटर की स्थापना करवाई। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के उन विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन का अवसर देना है, जो संसाधनों के अभाव में शहर नहीं जा पाते।
राष्ट्रीय मंच पर भी मिली पहचान | Hanumangarh News
नवनीत संधू के कार्यों की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई। संयुक्त राष्ट्र महिला (यूएन वुमेन) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय नेतृत्व कार्यशाला ‘शी लीड्स-3’ में उन्हें विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। 4 और 5 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यशाला में पूरे देश से केवल 30 महिला जनप्रतिनिधियों का चयन किया गया था, जिनमें हनुमानगढ़ की नवनीत संधू भी शामिल थीं। इस दौरान उनके मियावाकी मिशन, ‘ऑक्सीजन बैंक’ मॉडल और घग्घर बाढ़ के दौरान दिखाए गए नेतृत्व की विशेष सराहना की गई।
रूढ़ छवि को तोड़कर पेश की नई मिसाल
नवनीत संधू ने पंचायत स्तर पर महिला नेतृत्व को नई पहचान दी है। उन्होंने ‘सरपंच पति’ की पारंपरिक सोच को पीछे छोड़ते हुए स्वयं निर्णय लेकर उन्हें सफलतापूर्वक लागू किया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उनका यह सफर इस बात का संदेश देता है कि यदि महिलाओं को अवसर और समर्थन मिले, तो वे न केवल अपने क्षेत्र बल्कि पूरे समाज के विकास की दिशा बदल सकती हैं। Hanumangarh News















