विवादों पर स्थिति स्पष्ट हो
होना तो यह चाहिए था कि सर्वदलीय पार्टी मीटिंग के बाद किसी भी प्रकार के मतभेद की गुंजाईश न रहे लेकिन हुआ इससे विपरीत। सर्वदलीय मीटिंग के बाद सरकार व विपक्षी दलों के जमकर ब्यानबाजी हो रही है, जो अभी तक रूकी नहीं।
क्षेत्रवाद का प्रभाव
ताजा परिणामों से यह स्पष्ट है कि राज्यों के मुद्दों को राष्ट्रीय पार्टियों ने अनदेखा किया है,
जिस कारण लोगों ने एक बार फिर क्षेत्रीय पार्टियों या छोटी पार्टियों में दिलचस्पी दिखाई है।
अवैध से करनी होगी तौबा
देश में चल रहे अवैध आवासीय कारोबारों में लाखों संस्थान बिना किन्हीं सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं, जबकि इनमें बहुतों के पास आग से सुरक्षित परिसर का प्रमाण-पत्र होगा।
महंगाई अब मुद्दा ही नहीं रही
चाहे पिछले सालों की तुलना में संसद के कामकाज के आंकड़े अच्छे दिखते हैं लेकिन एक स्वस्थ, तार्किक, मुद्दों पर आधारित बहस लगभग गायब सी हो गई है और उसकी जगह मुद्दाविहिन, अतार्किक बहस ने ले लिया है। राजनीति के सिद्धांत खत्म होते जा रहे हैं। सत्ता हासिल करना ही आज एकमात्र सिद्धांत रह गया है।


























