हमसे जुड़े

Follow us

20.7 C
Chandigarh
Wednesday, March 11, 2026
More

    Holi 2026: यहाँ राख से खेली जाती है होली, कामदेव व भगवान शिव से जुड़ा है इतिहास

    Holi-With-Natural-Colors

    Holi 2026: नई दिल्ली। देशभर में 4 मार्च को रंगों का पावन पर्व होली हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। उत्तर भारत में यह उत्सव भक्त प्रह्लाद और होलिका दहन की कथा से जुड़ा है, जबकि दक्षिण भारत में इसे भगवान शिव और कामदेव की पौराणिक गाथा के साथ विशेष रूप से जोड़ा जाता है। दक्षिण भारत में होली को केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि अहंकार के दहन और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है। Holi 2026

    कर्नाटक स्थित यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां गर्भगृह में भगवान शिव और कामदेव की प्रतिमाएं एक साथ विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है कि होली के दिन दोनों देवताओं के संयुक्त दर्शन करने से जीवन के दोष और अहंकार का नाश होता है। मंदिर में स्थापित कामदेव की प्रतिमा ध्यान मुद्रा में शिवलिंग के समीप स्थित है, जो इस पौराणिक प्रसंग की स्मृति को जीवंत करती है।

    भस्म अथवा राख का तिलक लगाने की परंपरा इसी घटना की स्मृति में निभाई जाती है

    कथाओं के अनुसार, देवी सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव गहन तपस्या में लीन हो गए थे। सृष्टि संतुलन के लिए देवताओं ने कामदेव से सहायता मांगी। कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने हेतु पुष्पबाण चलाया। परिणामस्वरूप भगवान शिव के तीसरे नेत्र के तेज से कामदेव भस्म हो गए। इस प्रसंग को अहंकार के दहन का प्रतीक माना जाता है। दक्षिण भारत में होली के अवसर पर भस्म अथवा राख का तिलक लगाने की परंपरा इसी घटना की स्मृति में निभाई जाती है।

    रामलिंगेश्वर कामन्ना मंदिर में होली का उत्सव पांच दिनों तक चलता है। इस दौरान विविध धार्मिक अनुष्ठान और विशेष पूजन होते हैं। श्रद्धालु भगवान शिव और कामदेव को रजत आभूषण अर्पित करते हैं। मान्यता है कि संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्ति यदि इस पर्व पर चांदी का झूला अर्पित करें, तो उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। यह परंपरा दर्शाती है कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण और आत्ममंथन का भी अवसर है। Holi 2026