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Sunday, March 1, 2026
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    106 वर्षीय रामबाई ने मलेशिया में जीते चार मेडल

    Charkhi Dadri News
    चरखी दादरी। उड़नपरी दादी रामबाई जीत की ट्रॉफी व प्रशस्ति पत्र दिखाते हुए।

    उड़नपरी दादी ने विदेशी धरती पर बनाया विश्व रिकार्ड

    • 100 मीटर, 200 मीटर दौड़, गोला फेंक व डिस्कस थ्रो में सबको छोड़ा पीछे | Charkhi Dadri News

    चरखी दादरी (सच कहूँ/इन्द्रवेश)। ढलती उम्र में ‘उड़नपरी दादी’ के नाम से मशहूर 106 वर्षीय रामबाई (Rambai) की रफ्तार देख आप हैरान रह जाएंगे। रामबाई ने अपने सपने को पूरा करते हुए विदेशी धरती पर चार मेडल जीतकर विश्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया। उम्र का शतक पूरा कर चुकी रामबाई ने ढलती उम्र में भी खेलने का जज्बा इस कदर हावी है कि वह लगातार देश के लिए मेडल जीतना चाहती हैं। रामबाई के मन में सरकार की ओर से आर्थिक सहायता नहीं मिलने की टीस जरूर है, बावजूद उनका मेडल जीतने का ज़ज्बा जारी है। Charkhi Dadri News

    बता दें कि चरखी दादरी के गांव कादमा निवासी 106 वर्षीय रामबाई उस समय सुर्खियों में आई थी जब उन्होंने पिछले वर्ष बेंगलुरु में आयोजित नेशनल प्रतियोगिता के दौरान 100 मीटर की फर्राटा रेस 45.40 सेकंड में पूरी कर नया रिकॉर्ड बनाया था। पहले यह रिकॉर्ड मान कौर के नाम था, जिन्होंने 74 सैकिंड में रेस पूरी की थी। नेशनल रिकार्ड बनाने के बाद से रामबाई ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। विदेशी धरती पर खेलकर देश के लिए मेडल जीतने का सपना दिल में लिए पासपोर्ट भी बनवाया। उनका सपना मलेशिया में 16 व 17 सितंबर को हुई वर्ल्ड मास्टर चैंपियनशीप में पूरा हो गया। 106 वर्षीय बुजुर्ग दादी रामबाई ने रनिंग इवेंट में हिस्सा लेते हुए 100 मीटर दौड़, 200 मीटर दौड़, गोला फेंक और डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीता और रामबाई ने 200 मीटर की दौड़ में वर्ल्ड रिकार्ड बनाकर नये आयाम स्थापित किए हैं। गांव में पहुंचने पर रामबाई को सम्मानित करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। Charkhi Dadri News

    रामबाई की दोहती शर्मिला सांगवान ने बताया कि उनकी नानी के जोश को देखते हुए उन्हें गांव के खेतों में कच्चे रास्तों पर प्रेक्टिस करवाई। यही कारण है कि परिवार की चार पीढ़ियों ने भी पिछले वर्ष कई मेडल जीते थे। देशी खाने व कच्चे रास्तों में दौड़ लगाकर तैयारी करवाने का परिणाम है कि विदेशी धरती पर चार मेडलों पर कब्जा किया है। अगर सरकार उनकी मदद करें तो नानी रामबाई विदेशी धरती पर देश के लिए मेडल जीतने का सिलसिला जारी रख सकती हैं।

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