Anmol Vachan: क्यों उठना चाहिए सुबह 2 से 5 बजे? क्या है इस खास समय का आध्यात्मिक महत्व?
प्रभु को याद करना इन्सान का पहला कर्त्तव्य: पूज्य गुरु जी
Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि मालिक को याद करने के लिए इन्सान को सुबह 2 से 5 बजे के समय में उठना चाहिए और मालिक को याद करना चाहिए। इस समय को हिंदू धर्म में ब्रह्ममुहुर्त, इस्लाम धर्म में बांगे-वक्त, इलाही-ए-वक्त, सिख धर्म में अमृतवेला और इंग्लिश फकीर कहते हैं कि गॉडस प्रे टाइम या गॉडस प्रे इंडियन टाइम। बोली अलग-अलग है लेकिन बात वही है। इस समय में ऑक्सीजन की मात्रा भी सबसे अधिक, सबसे ज्यादा शुद्ध होती है। इस समय में जागने से शरीर ज्यादा तंदुरूस्त रहेगा। लेकिन इस समय में जागना तो दूर, शहरों में लोग इस समय में तो सोते हैं।
कहते हैं कि अभी तो टीवी, गपशप, डिनर आदि है और ब्रह्ममुहूर्त में सोते हैं। यही कारण है कि आज बीमारियां बढ़ी हुई हैं। हमारे आयुर्वेदा में लिखा हुआ है कि शाम का भोजन दिन रहते-रहते ही खा लेना चाहिए। आज विज्ञान भी मानने लगा है कि सूरज के समय बैक्टीरिया, वायरस, कीटाणु बहुत कम रहते हैं और जैसे-जैसे सूरज छिपता है तो ये बैक्टीरिया, वायरस बढ़ने लगते हैं। जब आप खाना खाते हैं तो आपके अंदर ज्यादा चले जाते हैं। आज कलियुग का जमाना है। लोग पार्टियां करते हैं और रात को 12-1 बजे भोजन करते हैं। सब साथ में बैठकर करते हैं, जबकि यह भी हमारे धर्मों में लिखा है कि भोजन, भजन, खजाना, नारी ये हैं पर्दे के अधिकारी।
यह बात वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं कि जैसे आप चार लोग एक साथ खाना खा रहे हैं। अगर किसी एक को कोई एलर्जी हो तो वह बाकि तीनों को भी रगड़ देगा (अर्थात् दूसरों को भी वह बीमारी हो सकती है।)। फिर बात आती है भजन की। भजन आप किसी और के लिए नहीं बल्कि अपने लिए करते हैं। इसलिए आराम से बिना किसी को तंग किए भजन करना चाहिए। इसके बाद खजाना तो आप वैसे ही पर्दे में रखते हो। फिर बात आती है नारी की। नारी के पर्दे से मतलब यह नहीं है कि आप घूंघट निकालो, लेकिन शरीर ढका हो।
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