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मानवता के पथ पर पूज्य गुरु जी की एक और मिसाल
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By Manmohan
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने पंजाब के संगरूर जिले के गांव कमोमाजरा के 20 वर्षीय जसप्रीत को बनाकर दिया पक्का मकान, सौंपी घर की चाबी सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। मानवता और जरूरतमंदों की सहायता के लिए लगातार चलाए जा रहे कार्यों के तहत डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने एक बार फिर सेवा और परोपकार का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
‘तो दु:ख कभी आयेंगे ही नहीं ’
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By Manmohan
सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सुबह-सवेरे मालिक को याद करना चाहिए लेकिन कोई-कोई होता है जो ऐसा करता है। अधिकतर तो तब याद करते हैं जब कोई परेशानी आती है या आने वाली होती है। नौकरी जाने का डर हो, तो मालिक शहद जैसा लगने लगता है।
ऐसे बन सकती है आत्मा, मालिक के दर्श-दीदार के काबिल
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By Manmohan
सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सभी धर्मों में लिखा है कि मनुष्य शरीर सबसे श्रेष्ठ शरीर है और जीवात्मा को यह शरीर 84 लाख जूनियों के बाद सबसे अंत में प्राप्त होता है। मनुष्य शरीर ही एकमात्र ऐसा जरिया है जिसमें आत्मा आवागमन से आजादी प्राप्त कर सकती है।
''एक ही है ऐसा जो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता''
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By Manmohan
पूज्य गुरु जी आगे फरमाते हैं कि मालिक, प्रभु, परमात्मा हमेशा था, है और हमेशा रहेगा, क्योंकि वो जन्म-मरण के चक्कर में नहीं आता। हालांकि वह प्रभु, परमात्मा सबके अंदर मौजूद है। हैरानीजनक है कि वो सबके अंदर है फिर भी वह जन्म-मरण में नहीं आता। इसलिए उसे सुप्रीम पावर कहा जाता है।