‘तो दु:ख कभी आयेंगे ही नहीं ’

सुबह-सवेरे मालिक को याद करना चाहिए: पूज्य गुरु जी

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सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि सुबह-सवेरे मालिक को याद करना चाहिए लेकिन कोई-कोई होता है जो ऐसा करता है। अधिकतर तो तब याद करते हैं जब कोई परेशानी आती है या आने वाली होती है। नौकरी जाने का डर हो, तो मालिक शहद जैसा लगने लगता है। Anmol Vachan

जब बच्चा बीमार हो और डॉक्टर कह दे कि यह बीमारी लाइलाज है, तब मालिक बहुत मीठे लगते हैं। कोई नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाता है, उस समय वो मालिक से कहता है कि हे भगवान, थोड़ा सा धक्का लगा देना, तेरा क्या जायेगा। मेरा रोजगार बन जायेगा और बदले में तुझे प्रसाद खिलाऊंगा। 

आप जी फरमाते हैं कि लोग भगवान को एक खिलौने की तरह समझते हैं। जिस तरह किसी बच्चे से काम करवाने के लिए आप उसे टॉफी का लालच देते हैं और बच्चा उस टॉफी के लालच में काम कर देता है। उसी तरह क्या आपने भगवान को बच्चा नहीं समझ रखा। जब कोई काम पड़ता है तो कहता है कि हे भगवान, आ जा तुझे लड्डू, पेड़े, देसी घी, चीनी खिलाऊंगा और जब काम निकल गया तो उसे पता ही नहीं होता कि भगवान जी भूखे हैं या भर पेट खा लिया।

आदमी के जीवन में दुखों का दौर भी आता है लेकिन सभी धर्मों में लिखा है कि इन्सान अगर सुख में सुमिरन करे तो उसे दु:ख कभी नहीं आते लेकिन इन्सान तो दु:ख का इंतजार करता रहता है कि कब दु:ख आए और वह सुमिरन करे। अगर सुख में ही सुमिरन कर लिया जाए तो दु:ख कभी आयेंगे ही नहीं और जीवन सुखमय गुजरता रहेगा। Anmol Vachan

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