खजूर से बढ़ेगी किसानों की आय! प्रशिक्षण में सिखाए गए लड्डू, शरबत, अचार, माउथ फ्रेशनर, केक, बिस्कुट आदि बनाने के गुर
प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों की आय और स्वरोजगार को बढ़ावा देना
बीकानेर (हि.स.)। खजूर उत्पादकों और उद्यमिता से जुड़ने के इच्छुक प्रतिभागियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को खजूर के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जुड़े विभिन्न उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे कृषि उत्पादों का बेहतर उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया। Agricultural Training
कार्यक्रम में 37 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें खजूर से लड्डू, शरबत, अचार, माउथ फ्रेशनर, बिस्कुट, केक, छुहारा, पिंड सहित अनेक मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की व्यवहारिक तकनीक सिखाई गई। विशेषज्ञों ने उत्पाद निर्माण के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार की संभावनाओं की भी जानकारी दी।
समापन समारोह में अनुसंधान निदेशक डॉ. एन. के. शर्मा ने कहा कि प्रदेश में खजूर की खेती का विस्तार लगातार हो रहा है। ऐसे में किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम और प्राकृतिक जोखिमों को देखते हुए किसानों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित करना समय की आवश्यकता है। Agricultural Training
प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अलग-अलग उत्पादों के निर्माण की तकनीकों का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों को खाद्य सुरक्षा मानकों और व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन की आवश्यक जानकारी भी दी गई, ताकि वे भविष्य में इसे स्वरोजगार के रूप में विकसित कर सकें।
उद्यान विभाग के अधिकारियों ने कहा कि खजूर आधारित आकर्षक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के विकास के साथ यदि प्रभावी विपणन रणनीति अपनाई जाए तो किसानों और स्वयं सहायता समूहों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
राजीविका से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण महिलाओं, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को लघु उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन किसानों की आय बढ़ाने, फसल की बर्बादी कम करने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। Agricultural Training