CDLU में सजा कला का मंच, लोकगीतों, पश्चिमी संगीत और मिमिक्री से विद्यार्थियों ने बिखेरे प्रतिभा के रंग

भाषण, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर मेकिंग और रंगोली में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा, गायक वरिंदर संधू ने बिखेरे सुर

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CDLU Triveni Youth Festival: सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। कहीं हरियाणवी लोकगीतों की मिठास गूंजी तो कहीं पश्चिमी संगीत की धुनों ने समां बांधा। किसी मंच पर कलाकारों ने अभिनय और मिमिक्री से दर्शकों को प्रभावित किया तो कहीं भाषण और प्रश्नोत्तरी में विद्यार्थियों ने अपनी बौद्धिक क्षमता का प्रदर्शन किया। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में चल रहे चार दिवसीय 13वें त्रिवेणी युवा महोत्सव के तीसरे दिन परिसर में प्रतिभा, कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला।

RANGOLI
रंगोली बनाता हुआ विद्यार्थी।

 

दिन की शुरूआत निर्णायक मंडल के सदस्यों, युवा कल्याण निदेशक प्रो. मंजू नेहरा, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. सुरेंद्र सिंह, कल्चरल कोऑर्डिनेटर प्रो. रणजीत कौर, ब्रह्मजीत सिंह और सहायक युवा कल्याण निदेशक राजेश छिकारा सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने दीप प्रज्जवलित कर की। इसके बाद सरस्वती वंदना के साथ प्रतियोगिताओं का आगाज हुआ। इस अवसर पर प्रो. अशोक मलिक, प्रो. रविंद्र, डॉ. दीपक पाठक, डॉ. किरण, मुस्कान और योगेश सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

लोकगीतों और पारंपरिक वेशभूषा ने खींचा ध्यान

महोत्सव में हरियाणवी लोकगीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने खास आकर्षण पैदा किया। 'जय हरियाणा' और 'सूरज ढल गया, अंबर में छाई लाली' जैसे गीतों पर प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। दामण, कुर्ती, चुनरी और पारंपरिक आभूषणों से सजे कलाकारों ने लोकनृत्य के माध्यम से हरियाणा की संस्कृति, ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं को जीवंत किया। युवा कल्याण निदेशक प्रो. मंजू नेहरा ने बताया कि मुख्य मंच एमपी हॉल में हरियाणवी समूहगान, मिमिक्री और वन एक्ट प्ले की प्रतियोगिताएं हुईं। ऑडिटोरियम में पश्चिमी एकल गायन, पश्चिमी एकल वादन, पश्चिमी समूहगान और सामान्य लोकगीत एकल गायन की प्रस्तुतियां हुईं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक और आधुनिक संगीत के जरिए अपनी प्रतिभा दिखाई।

PANTING
पेंटिंग बनाते विद्यार्थी। 

 

भाषण से रंगोली तक, हर मंच पर दिखी रचनात्मकता

सीवी रमन भवन के सेमिनार हॉल में हिंदी-अंग्रेजी भाषण प्रतियोगिताओं और प्रश्नोत्तरी का प्रारंभिक चरण आयोजित किया गया। वहीं यूआईटीडीसी भवन में पोस्टर मेकिंग और रंगोली प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने रंगों और कल्पनाओं से अपनी कला का प्रदर्शन किया। महोत्सव में गायक वरिंदर संधू की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने 'विजे मांवा दे' और 'ते कावां वे, सुन कावां' जैसे गीतों से श्रोताओं को लोकसंगीत के रंग में रंग दिया। 

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