सत्संग में पैदा होती है प्रभु-भक्ति की भावना
अगर आप मालिक का नाम जपना चाहते हैं तो आप सत्संग सुनें। तभी आपको प्रेरणा मिलेगी, आपके अंदर मालिक के नाम के प्रति लगन लगेगी।
कभी भी किसी का बुरा न सोचो, सबका भला मांगो : पूज्य गुरु जी
इतिहास में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं, कि मालिक के प्यारे, परम पिता परमात्मा स्वरूप होते हुए भी उनके अंदर दीनता-नम्रता हद से ज्यादा थी और जितनी दीनता-नम्रता होती है, उतनी ही मालिक की खुशियां जल्दी व ज्यादा मिला करती हैं।
डेरा श्रद्धालुओं ने सड़कों पर भटकते मंदबुद्धि का उपचार करवा 800 किमी. दूर घर पहुँचाया
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत...


























