Bangladesh Elections: बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर, दुनिया भर की नजर भी भारत-बांग्लादेश संबंधों पर टिकी

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Bangladesh Election 2026: नई दिल्ली। बांग्लादेश में मतदाता सूचियों को लेकर विवाद और छिटपुट हिंसा की खबरों के बीच गुरुवार को राष्ट्रीय संसदीय चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई। बांग्लादेश निर्वाचन आयोग के अनुसार दोपहर 12 बजे तक देशभर में औसतन 32.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। Bangladesh Elections

आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने राजधानी स्थित निर्वाचन भवन में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि 42,651 मतदान केंद्रों में से 32,789 केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर यह प्रतिशत निर्धारित किया गया है। देश की 300 संसदीय सीटों में से 299 पर मतदान जारी है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश क्षेत्रों में मतदान शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो रहा है।

राजनीतिक परिदृश्य और भारत-बांग्लादेश संबंध | Bangladesh Elections

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव देखा गया है। वर्तमान में मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम व्यवस्था कार्यरत है, जिसकी विदेश नीति को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा बनी हुई है। विश्लेषकों का मत है कि हाल के समय में ढाका की नीतियों में ऐसे संकेत दिखाई दिए हैं, जो भारत के रणनीतिक हितों को प्रभावित कर सकते हैं।

भारत का स्पष्ट मत रहा है कि बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शीघ्र बहाल हो और निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं। भारत ने स्वतंत्र एवं पारदर्शी चुनाव के प्रति अपना समर्थन भी व्यक्त किया है। विभिन्न सर्वेक्षणों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बढ़त मिलती दिखाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव परिणाम चाहे जिस दल के पक्ष में जाएं, भारत के लिए सुरक्षा और स्थिरता सर्वोपरि मुद्दे रहेंगे।

सीमा सुरक्षा और रणनीतिक महत्व

भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो भारत की किसी भी पड़ोसी देश के साथ सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा मानी जाती है। सीमा के कुछ हिस्सों में बाड़बंदी अधूरी है, जिससे अवैध आव्रजन, तस्करी, मादक पदार्थों का व्यापार तथा जाली मुद्रा की आवाजाही जैसी चुनौतियां उत्पन्न होती रही हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए बांग्लादेश की आंतरिक स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक सुदृढ़ और निर्वाचित सरकार दोनों देशों के बीच समन्वय को मजबूत कर सकती है और सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकती है।

पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भारत और बांग्लादेश के बीच आतंकवाद-रोधी सहयोग उल्लेखनीय रहा था। संयुक्त अभियानों और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान से दोनों देशों ने कई सफल कार्रवाइयां की थीं। हालांकि हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद सुरक्षा एजेंसियां क्षेत्रीय गतिविधियों पर सतर्क दृष्टि बनाए हुए हैं। भारत की प्राथमिकता यही है कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग का संतुलन बना रहे और कट्टरपंथी तत्वों को पनपने का अवसर न मिले।

व्यापार और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति

भारत और बांग्लादेश दशकों से महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के सफल क्रियान्वयन में बांग्लादेश की भूमिका अहम मानी जाती है। ऊर्जा सहयोग, बिजली व्यापार और आधारभूत संरचना परियोजनाएं दोनों देशों के संबंधों की मजबूती का प्रतीक रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है तो द्विपक्षीय सहयोग और भी प्रगाढ़ हो सकता है। परंतु किसी भी प्रकार की अस्थिरता से दोनों देशों द्वारा वर्षों में विकसित विश्वास और रणनीतिक साझेदारी प्रभावित हो सकती है। Bangladesh Elections

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