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Rupee Latest News: आरबीआई ने उठाए सख्त कदम तो रुपया हुआ मजबूत
RBI के नए कदमों से डॉलर के मुकाबले 95.76 के स्तर पर पहुंची भारतीय मुद्रा
Indian Rupee vs. Dollar: मुंबई (सच कहूँ/एजेंसी)। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर नियंत्रण के लिए उठाए गए नए नियामकीय कदमों का असर रुपये पर दिखाई दिया। सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा मजबूती के साथ खुली और एक समय एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज करते हुए 95.76 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गई।
रुपये की मजबूती का असर ऑफशोर विदेशी मुद्रा कारोबार में भी नजर आया। केंद्रीय बैंक के हालिया फैसलों को बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण रखने और भारतीय मुद्रा को सहारा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। वर्ष 2013 के टेपर टैंट्रम के बाद विदेशी मुद्रा बाजार को स्थिर करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदमों से भी इनकी तुलना की जा रही है।
ऑफशोर बाजार में भी रुपये ने दिखाई मजबूती
एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने के नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (NDF) बाजार में रुपया कारोबार के दौरान 94.17 प्रति डॉलर तक पहुंच गया था। यह पिछले स्तर की तुलना में लगभग 2.7 प्रतिशत की तेजी थी। हालांकि, बाद में रुपये की बढ़त कुछ कम हुई और यह करीब 0.7 प्रतिशत पर आ गई।
आरबीआई ने अक्टूबर की शुरुआत में विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव से जुड़े लेनदेन के लिए नए नियम घोषित किए थे। इनका उद्देश्य ऐसे कारोबार पर अंकुश लगाना है, जिसमें वास्तविक विदेशी मुद्रा जोखिम के बजाय बाजार के उतार-चढ़ाव से लाभ कमाने की कोशिश की जाती है।
नए प्रावधानों के तहत बिना हेजिंग वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय बैंक ने फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) नाम से एक नई व्यवस्था शुरू की है।
नियमों के अनुसार, अधिकृत डीलर रुपये से जुड़े ऐसे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक नहीं कर सकेंगे, जिसे पहले रद्द किया जा चुका हो। हालांकि, अनुबंध की निर्धारित अवधि समाप्त होने पर उसे आगे बढ़ाने यानी रोलओवर की अनुमति दी गई है।
हेजिंग के लिए लिखित घोषणा जरूरी
आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदे करने वाले ग्राहकों के लिए भी अनुपालन संबंधी शर्तें तय की हैं। अब ग्राहकों से लिखित घोषणा लेना जरूरी होगा कि जिस वास्तविक जोखिम को सुरक्षित करने के लिए हेजिंग की जा रही है, उसके लिए किसी दूसरे अधिकृत डीलर के माध्यम से पहले ही हेजिंग नहीं की गई है।
केंद्रीय बैंक ने कुछ बड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए रिजर्व रखने की व्यवस्था भी की है। इसके तहत 20 लाख डॉलर से अधिक मूल्य वाले निर्धारित अनुबंधों पर अधिकृत डीलरों को अनुबंध की रुपये में समतुल्य राशि का 20 प्रतिशत नकद रिजर्व आरबीआई के पास रखना होगा। यह रिजर्व अनुबंध की अवधि समाप्त होने तक रोजाना बनाए रखना होगा। इसके अलावा, कई छोटे लेनदेन के जरिए नियामकीय सीमाओं को दरकिनार करने की कोशिश को भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
तेल कंपनियों के लिए भी विशेष व्यवस्था
आरबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष व्यवस्था समेत अन्य उपाय भी घोषित किए थे। ये फैसले ऐसे समय में आए, जब रुपया 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में भी बढ़ोतरी की थी और संकेत दिया था कि जरूरत पड़ने पर मौद्रिक नीति को और सख्त किया जा सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की आगे की दिशा वैश्विक डॉलर की चाल, आयातकों की मांग, पूंजी प्रवाह और आरबीआई के नियामकीय कदमों के असर पर निर्भर करेगी।