DEPTH Campaign: डेरा सच्चा सौदा की ‘डेप्थ मुहिम’ नशे की दलदल में फंसे युवाओं को दे रही नई जिंदगी

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‘नशा तो बर्बादी का घर है, यह बात डेरा सच्चा सौदा में आकर समझ आई’

DEPTH Campaign: सरसा (सच कहूँ/रविंद्र शर्मा)। समाज को दीमक की तरह खा रहा नशा आज एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। गांवों से लेकर शहरों तक, युवा ही नहीं बल्कि बुजुर्ग और बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं। जिस घर में नशे रूपी अभिशाप ने कदम रखा, वहां खुशियां उजड़ गईं और परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गया। नशे के इस दानव पर नियंत्रण पाने के लिए डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाई जा रही डेप्थ मुहिम लगातार नशे से ग्रस्त लोगों के घरों में आशा की किरण जगा रही है। डेरा द्वारा लगाए जा रहे नशा छुड़ाओ कैंपों के माध्यम से लाखों लोग नशे की दलदल से बाहर निकलकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। Sirsa News

इसी मुहिम के तहत नशा छोड़कर स्वस्थ होकर घर लौट रहे जिला मानसा के एक गांव से आए वरिंदर सिंह (काल्पनिक नाम) ने बताया कि वह मेडिकल नशे का आदी हो गया था। मेहनत-मजदूरी कर परिवार पालने वाला यह युवक धीरे-धीरे अपने ही परिवार पर बोझ बन गया। वह रोजाना मेडिकल नशा करता था। वरिंदर सिंह ने बताया कि जब डेरा श्रद्धालुओं ने उसकी और उसके परिवार की दयनीय स्थिति देखी तो वे उसे डेरा सच्चा सौदा में चल रहे नशा छुड़ाओ कैंप में लेकर आए। यहां पहुंचने के बाद शुरूआती चार दिन तक उसे यह भी पता नहीं था कि वह कहां है।

पूज्य गुरु जी के आशीर्वाद और सेवा-संभाल ने बदली जिंदगी | Sirsa News

इस दौरान जरूरत पड़ने पर सेवादारों ने स्वयं चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाई और उपचार कराया। जब उसे होश आया तो पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पवित्र वचनों के अनुसार उसे लंगर-प्रसाद ग्रहण कराया गया। उसने बताया कि यहां सेवादार बहुत अच्छे तरीके से सेवा-संभाल करते हैं। नशा छोड़ने वाले मरीजों को दूध, पौष्टिक आहार और प्रोटीनयुक्त भोजन दिया जाता है।

यहां घर जैसा माहौल मिलता है | Sirsa News

वरिंदर सिंह ने कहा कि नशा तो बर्बादी का घर है, यह बात उसे डेरा सच्चा सौदा में आकर सही मायने में समझ आई। उसने कहा कि नशे से पीड़ित लोगों को अपना इलाज करवाने के लिए यहां जरूर आना चाहिए। यह कैंप सामान्य नशा छुड़ाओ केंद्रों से बिल्कुल अलग है, जहां आने पर घर जैसा वातावरण महसूस होता है। अच्छे खानपान, सेवा-संभाल और आध्यात्मिक माहौल में रहकर नशा छोड़ना कठिन नहीं लगता। उसने बताया कि जैसे-जैसे दिन बीतते गए, वह पूरी तरह स्वस्थ होता गया और अब नशे से पूरी तरह मुक्त होकर अपने घर लौट रहा है।

आजकल युवा और छोटे-छोटे बच्चे नशे में डूबे पड़े हैं। दुख होता है जब कोई माँ रोती है जिसका बेटा नशे के कारण इस दुनिया से चला गया। नशे के राक्षस से समाज को बचाने की ओर किसी का ध्यान नहीं। अगर सब मिलकर प्रयास करें तो अकेला पंजाब या हरियाणा नहीं, पूरा देश और पूरा संसार नशे के इस राक्षस से बच सकता है। Sirsa News
-पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, डेरा सच्चा सौदा, सरसा

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