हमसे जुड़े

Follow us

19.8 C
Chandigarh
Thursday, February 26, 2026
More
    Home विचार अफगानिस्तान स...

    अफगानिस्तान से मिले रहे संदेश चिंताजनक

    Afghan Government

    अफगानिस्तान में हालात बहुत गंभीर हैं और महसूस यही हो रहा है कि तालिबान हावी है और बढ़ता जा रहा है। ताजा खबर यह है कि तालिबानियों ने अफगानिस्तान के सबसे मुख्य शहर कंधार पर अपना कब्जा कर लिया है। तालिबानों की इस अतिवादी मुहिम का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि सरकार ने तालिबान के सामने घुटने टेककर सरकार में हिस्सेदारी की पेशकश कर दी है। देर-सवेर तालिबान राजधानी काबुल पर कब्जा कर सकते हैं। जिन बातों ने सभी को अचरज में डाल दिया है, उसमें एक है तेज गति से तालिबान का बढ़त बनाना और दूसरी है उसकी रणनीति। दक्षिण अफगानिस्तान में तालिबान की ताकत पहले से थी, पर जिस तरह से उसने उत्तर और पश्चिम में अपने कदम बढ़ाये हैं और बढ़ा रहे हैं, इसने काफी आश्चर्यचकित किया है।

    यह घटना सामान्य, स्वाभाविक या सहज नहीं बल्कि किसी अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा हो सकती है। अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश की कोशिशों के बावजूद तालिबान आगे बढ़ते रहे और रूस, चीन जैसे देश चुपचाप बैठे रहे। बात केवल राजनीतिक परिवर्तन की नहीं बल्कि यह अफगानिस्तान में सामाजिक और संस्कृतिक परिवर्तन का भी समय है। एक बार फिर अफगानिस्तान कट्टरवादियों के हाथों में जा रहा है। गत दिवस एक गुरुद्वारा साहिब में एक धार्मिक चिह्न के साथ छेड़छाड़ की गई। इसी तरह तालिबानों ने महिलाओं के लिए 1990 के दशक जैसे फरमान जारी किए। भविष्य की परिस्थितियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच चुप नजर आ रहा है।

    यह कहना कठिन नहीं है कि अमेरिका का समर्थन प्राप्त सरकार की हार में जीत किसकी हो रही है। महिलाओं के अधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को किसी देश का आंतरिक मामला कहकर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि यह मानवीय अधिकारों का मामला भी है। अब देखना यही है कि क्या अफगानिस्तान की हकूमत पर काबिज होकर तालिबान संतुष्ट रहेंगे? क्या तालिबान जिस प्रकार की सामाजिक पाबंदियां लगा रहे हैं, संयुक्त राष्ट्र को हजम होंगी। नि:संदेह अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतक जंग में अफगानिस्तान दक्षिणी एशिया में एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। आतंकवाद और शांति बहाल करने के संदर्भ में अफगानिस्तान की सरगर्मियां चर्चा का विषय बन गई हैं। भारत को इस घटना में पूरी तरह चौकस होकर ठोस कूटनीति बनानी होगी।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramLinkedIn , YouTube  पर फॉलो करें।