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    कोरोना को लेकर जनता चिंतित, नेता बेफिक्र

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    देशभर में कोरोना संक्रमण की बढ़ती संख्या के मद्देनजर हो रही कोशिशों का जायजा लेने तथा आगे की रणनीति बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की। प्रधानमंत्री ने कहा कि ओमिक्रॉन वैरिएंट पुराने सभी वैरिएंट्स के मुकाबले ज्यादा तेजी से फैल रहा है। यह अब तक संभावना से भी ज्यादा संक्रामक साबित हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्पष्ट है कि हम सभी को ज्यादा सतर्क रहना होगा, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जनता में पैनिक का माहौल न बने। यदि हम चुनावों की तरफ देखें तो ऐसा लग ही नहीं रहा कि इस देश में कोई वायरस फैला हुआ है। कोरोना की चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन चुनावों के संदर्भ में जब बात होती है तो सब चुप्पी साध लेते हैं। उस वक्त व्यवस्थाएं करने की बातें होने लग जाती है। बुधवार को दो लाख 47 हजार 418 नए कोरोना संक्रमित मिले जबकि 380 लोगों की मौत हुई। दूसरी तरफ सरकार और चिकित्सक कह रहे हैं कि नया वायरस ज्यादा गंभीर नहीं है।

    इस सबके बावजूद कोई इन पर यकीन करने को तैयार नहीं। महाराष्ट्र और दिल्ली में तेजी से बढ़े केस के बाद सरकार द्वारा लागू की गई सख्ती और दिल्ली में लगे वीकेंड लॉकडाउन से जनता में भय व्याप्त है। श्रमिक पलायन कर रहे हैं। सब डरे सहमे हैं। कोरोना के बढ़ते केसों को लेकर अधिकतर लोग चिंतित हैं, किंतु राजनैतिक दल नहीं चाहते कि चुनाव टलें। सरकार भी इस पर चुप्पी साधे है। ऐसे में चुनाव आयोग ने चुनाव कराने की घोषणा कर दी। कोरोना महामारी के काल में आयोग को प्रदेश में मतदाताओं और मतदान में लगने वाले कर्मियों की राय लेनी चाहिए थी। क्या वह भी इसके लिए तैयार हैं? जिन्हें वोट डालने हैं, उनसे पूछा नहीं गया और तय कर दिया कि चुनाव तो होंगे ही।

    चुनाव आयोग ने रैली, सभा और बाइक रैली आदि निकालने पर रोक लगाई है। काफी बंदिशें रखीं हैं। इन सबके बावजूद चुनाव सरकारी कर्मचारी, पुलिस, पैरा मिलिट्री फोर्स को कराना है। बेशक ओमीक्रोन से पूरी दुनिया त्रस्त है और तेजी से फैलने की इसकी क्षमता के मद्देनजर हम सबको किसी भी तरह का जोखिम मोल लेने से हर हाल में बचना चाहिए। लेकिन यह भी याद रखने की जरूरत है कि शरीर को नुकसान पहुंचाने के लिहाज से यह अन्य वेरिएंट जितना खतरनाक नहीं है। इसलिए फिलहाल कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी सख्ती से पालन करते और कराते हुए अपनी नियमित गतिविधियां जारी रखना ही सबसे अच्छी नीति हो सकती है।

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