Ayurveda :आयुर्वेद में छुपा है अनुवांशिक बीमारियों का उपचार 

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देवीलाल बारना। आयुर्वेद (Ayurveda) में अनेकों ऐसी बीमारियों का इलाज छुपा हुआ है, जिसके लिए मरीज महंगे इलाज करवाने के बाद भी छुटकारा नहीं पा सकता। अनेकों ऐसे अनुवांशिक रोग हैं जो लाइलाज प्रतीत होते हैं, लेकिन आयुर्वेद उस बीमारी को जड़ से खत्म कर सकता है। ये रोग जन्म के साथ ही व्यक्ति को लग जाते हैं। इनमें आमतौर पर गठिया रोग, गेहूं की एलर्जी, मुंह से लार का सूख जाना, आंखों से पानी सूख जाना, बालों का झड़ना, थकावट समेत 100 से भी ज्यादा ऐसे रोग हैं जिनसे बहुत से लोग परेशान हैं।

इसको लेकर सच कहूँ संवाददाता ने श्री कृष्णा आयुष विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजा सिंगला से विशेष बातचीत की। बता दें कि डॉ. राजा सिंगला पिछले 13 वर्षों से न्यूरोमस्कूलर, मस्कूलोस्केलेटल और ऑटोइम्यून पर काम कर रहे हैं और स्नोग्रेस सिंड्रोम जोकि एक लाइलाज ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, उसके 200 से अधिक मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके अलावा दूसरे ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जैसे   तुपस, सोरिएसिस, मायोसिटिस आदि से पीड़ित मरीजों का भी इलाज कर चुके हैं।

सवाल: ओटोइम्यून डिसऑर्डर किसे कहते है?

जवाब : ओटोइम्यून डिसऑर्डर एक आनुवंशिक बीमारी है। हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम बाहरी तत्वों से शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा करता है। आनुवंशिक बीमारी में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करना शुरू कर देता है। आनुवंशिक बीमारी होने के मुख्य कारण हमारा विरूद्ध आहार विहार, खराब जीवन शैली और पर्यावरण भी हो सकता है। मुख्यत: 100 से ज्यादा प्रकार के ओटोइम्यून डिसऑर्डर पाए जाते हैं। जैसे कि स्जोग्रेन सिंड्रोम, पोलीमायो-साईड्स, लीयूपस, सीलयक डिस्सीस, रहूमटॉइड आर्थराइटिस, आंक्यलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस, इर्रिटबल बोवेल सिंड्रोम, टाइप 1 डायबिटीज व अन्य।

सवाल : कोविड के बाद से बढ़ते हुए आनुवंशिकी बीमारी के कारण?

जवाब : महामारी कोविड के बाद आनुवंशिक बीमारी में बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि कोविड के समय में अत्यधिक स्टेरॉयड का प्रयोग करने से शरीर का इम्यून सिस्टम पर प्रभाव होता है। इम्यूनटी कम होने से आनुवंशिक बीमारियां ज्यादा देखने को मिल रही है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ओटो इम्यून डिसऑर्डर अधिक पाए जाते हैं।

सवाल: ओटोइम्यून डिसऑर्डर की पहचान कैसे करें?

जवाब : सबसे पहले मरीज की पूरी हिस्ट्री के साथ फिजिकल एग्जामिनेशन करनी होती है। शरीर में हिमोग्लोबिन का बार-बार कम होना ओटो इम्यून डिसऑर्डर की ओर संकेत करता है। विभिन्न प्रकार के ओटोइम्यून डिसऑर्डर का पता लगाने के लिए एक विशेष प्रकार की खून जांच एएनए टेस्ट करवाया जाता है।

सवाल: आयुर्वेद द्वारा ओटोइम्यून डिसऑर्डर को कैसे ठीक किया जाता है?

जवाब : आयुर्वेद में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले विभिन्न द्रव्यों का प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद (Ayurveda) संहिता में वर्णित विभिन्न कल्प जैसे कषाय, रस औषधियां, सत्व इनके साथ-साथ विभिन्न प्रकार के बस्ति के द्वारा ओटो इम्यून डिसऑर्डर को ठीक किया जाता है। आयुर्वेद संहिता में वर्णित दिनचर्चा, ऋतुचर्या एवं सद्युत के पालन के द्वारा आनुवंशिक बीमारियों से बचा जा सकता है।

सवाल: आप आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान में किन-किन ओटोइम्यून डिसऑर्डर पर काम कर रहे हैं?

जवाब: लगभग 10-15 मरीज ओटोइम्यून से प्रसित भरी हर ओपीडी में आ रहे हंैं। इसमें मुख्यत: संधिशोथ, स्जोग्रेन सिंड्रोम, ल्यूपस, सीलिएक रोग, चिड़चिड़ा, आंत्र सिंड्रोम आदि हैं। इनमें से स्जोग्रेन सिंड्रोम का पूरे विश्व में कोई सक्षम इलाज नहीं है। हमारे पास स्जोग्रेन सिंड्रोम के 200 से भी ज्यादा केस चल रहे हैं। 40-50 मरीज का इलाज सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ है। अब उन मरीजों के मुंह में बिना दवाई के लार, आंखों में आंसू प्राकृतिक रूप से बन रहे हैं। आयुर्वेद संहिताओं में ऑटोइम्यून डिऑर्डर का सीधा सम्बन्ध नहीं पाया जाता है, पर लक्षणों के आधार पर ऑटोइम्यून डिस्आॅर्डर का वातरक्त से संबंध पाया जाता है। उसके अनुसार संहिताओं का अध्ययन किया गया है।

सवाल: ऑटोइम्यून डिसऑर्डर में कौन सा पंचकर्म करवाना चाहिए?

जवाब: पंचकर्म शरीर का शोधन करने की प्रक्रिया है जिसमें मेडिकेटिड घी पिलाकर नियंत्रित दस्त लगवाए जाते हैं जिसे विरेचन के नाम से जाना जाता है और कुछ आयुर्वेद कषाय ऐसे होते हैं जिन्हें एनल रूट के द्वारा शरीर में प्रवेश कराया जाता है जैसे बस्ति प्रक्रिया। ऐसे कुछ ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जिनमें विशेषत: पंचकर्म करवाया जाता है जैसे स्जोग्रेन सिंड्रोम में नेत्रधारा, नेत्र तर्पणा सोरायसिस में तक्रधारा, लयूपस में शिरोधारा आदि शामिल हैं।

सवाल: स्जोग्रेस सिंड्रोम के लिए महत्वपूर्ण सलाह क्या है?

जवाब: इसके लिए कई बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जिसमें दिन के समय ना सोना। रात में देर तक न जागना। दही से बने किसी पदार्थ का सेवन ना करना। अभिष्यंदी आहार का सेवन न करना। धूम्रपान व शराब का सेवन न करना। मैदे से बने किसी भी आहार का सेवन न करना। मीठे का अधिक सेवन न करना शामिल है।

सवाल: क्या एक व्यक्ति में एक से अधिक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर हो सकते हैं?

जवाब: हाँ, एक व्यक्ति में एक साथ एक से अधिक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर हो सकते हैं। हमारे पास कुछ मरीज ऐसे हैं जिनको स्जोग्रेन सिंड्रोम के साथ-साथ गठिया, लुपस, सीलिएक डिसऑर्डर भी हैं।