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    रूसी वैज्ञानिकों ने विकसित की ऑटोनॉमस ड्रोन स्वार्म तकनीक

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    Sfedu: रूसी वैज्ञानिकों ने विकसित की ऑटोनॉमस ड्रोन स्वार्म तकनीक

    रूस (सच कहूँ न्यूज़)। दक्षिणी संघीय विश्वविद्यालय (SFedU) के एडवांस्ड इंजीनियरिंग स्कूल ने एक अनूठी कृषि ड्रोन लैब स्थापित की है, जो खेती के लिए स्वार्म तकनीक विकसित कर रही है। इस परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और कृषि विज्ञान का संयोजन किया गया है ताकि सटीक खेती के लिए प्रभावी समाधान तैयार किए जा सकें।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से फसल उत्पादन में 20% तक वृद्धि, उर्वरकों की खपत में 5% कमी और उपज में अस्थिरता 50% तक घटने की संभावना है। यह विशेष रूप से दक्षिणी रूस जैसे जोखिमपूर्ण कृषि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।

    इस परियोजना की मुख्य नवीनता ऑटोनॉमस ड्रोन स्वार्म नियंत्रण प्रणाली है। लैब प्रमुख आंद्रेई लेशचेव-रोमानेंको बताते हैं, “हम ‘एक ऑपरेटर – एक ड्रोन’ मॉडल से ‘एक ऑपरेटर – ड्रोन स्वार्म’ मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे संचालन लागत घटेगी और कृषि निगरानी की दक्षता बढ़ेगी।”

    लैब में अत्याधुनिक तकनीकें मौजूद हैं, जैसे कि फसल सुरक्षा स्प्रे करने वाले विशेष ड्रोन, खेतों की निगरानी के लिए कंप्यूटर विजन सिस्टम और मोबाइल कंट्रोल स्टेशन। यहां मल्टीस्पेक्ट्रल और इंफ्रारेड इमेजिंग का विश्लेषण करने के लिए स्मार्ट एल्गोरिदम भी विकसित किए जा रहे हैं, जिससे मिट्टी और फसल की स्थिति का सटीक आकलन संभव होगा।

    SFedU की इंटेलिजेंट एग्रोइकोसिस्टम्स लैब की प्रमुख प्रोफेसर तातियाना मिन्किना कहती हैं, “हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग कृषि में नई संभावनाएं खोलती है। इससे फसलों के विकास के महत्वपूर्ण चरणों की निगरानी, रोगों की भविष्यवाणी और कृषि हस्तक्षेप के सही समय का निर्धारण किया जा सकता है।”

    यह परियोजना रूस के ‘अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स’ राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत संचालित की जा रही है। शुरुआती परीक्षण काबार्दिनो-बाल्कारिया में किए जाएंगे, जिसमें ड्रोन-सर्विस एलएलसी नामक कृषि ड्रोन डेवलपर भी साझेदार है।

    रुस्तव क्षेत्र के 2030 तक के ड्रोन विकास कार्यक्रम से भी इसे समर्थन प्राप्त हुआ है। परियोजना का उद्देश्य 100 हेक्टेयर तक के खेतों की निगरानी करना है, जिसके लिए 3डी प्रिंटिंग, डिजिटल मॉडलिंग और डेटा प्रोसेसिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

    इस परियोजना में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ शामिल हैं, और यह एक शोध व शिक्षण केंद्र के रूप में भी कार्य कर रहा है, जहां छात्र स्वायत्त ड्रोन संचालन व प्रोग्रामिंग का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

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