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    वैज्ञानिकों की नई तकनीक से चल सकेंगे लकवे के मरीज

    मस्तिष्क से नियंत्रित होती है ये डिवाइस | Exoeleton device

    • फ्रांस के रहने वाले एक मरीज पर किया गया सफल ट्रायल
    • चार साल पहले हुए हादसे के बाद पैरालिसिस का शिकार हो गए थे थिबॉल्ट

    पेरिस (एजेंसी)। लकवाग्रस्त मरीजों के लिए अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क से नियंत्रित होने वाला एक ऐसा एक्सोस्केलेटन (Exoeleton device) तैयार किया है, जिससे पैरालिसिस (Paralysis) के शिकार लोग भी चल फिर सकेंगे। एक्सोस्केलेटन हड्डियों के ढांचे की तरह काम करने वाला डिवाइस है, जो बाहर से शरीर को सहारा देता है। मस्तिष्क से संचालित होने वाले इस नए सिस्टम से टेट्राप्लेजिक्स के मरीजों के लिए उम्मीद की किरण जगी है।

    इस नई तकनीक का इस्तेमाल फ्रांस के रहने वाले थिबॉल्ट (28) पर किया जा रहा है।

    टेट्राप्लेजिक्स के कारण मरीज के कंधे के नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर देता है। फिलहाल इस नई तकनीक का इस्तेमाल फ्रांस के रहने वाले थिबॉल्ट (28) पर किया जा रहा है। एक नाइट क्लब में हुए हादसे के कारण चार साल पहले थिबॉल्ट के कंधे के नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। कई महीने कंप्यूटर पर प्रशिक्षण लेने के बाद वह एक्सोस्केलेटन की मदद से चलने लगे हैं। उन्होंने कहा, इस तकनीक से मुझे नई जिंदगी मिली है। मैं अभी एक्सोस्केलेटन की मदद से अपने घर तो नहीं जा सकता, लेकिन कुछ दूरी तक चल लेता है। जब मैं चाहता हूं, चलता हूं और जब रुकना चाहता हूं, रुक जाता हूं।’

    किस तरह काम करता है डिवाइस

    फ्रांस स्थित हॉस्पिटल ऑफ ग्रेनोबेल एल्पेस के अलीम लुईस बेनाबिड ने कहा, ‘पैरालिसस के बाद भी मस्तिष्क हाथ व पैरों को घूमने का सिग्नल दे सकता है। हालांकि, हाथ व पैर मस्तिष्क के कमांड को लागू कर पाने में अक्षम होते हैं।’ इसी के चलते शोधकर्ताओं ने थिबॉल्ट के सिर के दोनों हिस्से में एक रिकार्डिग डिवाइस प्रत्यर्पित किया। ये डिवाइस सेंसोरिमोटर कार्टेक्स की जानकारियां रिकार्ड कर सकते थे। मस्तिष्क में मौजूद ये कार्टेक्स ही शरीर की चलने-फिरने की क्षमता को नियंत्रित करते हैं। इस रिकॉर्डर के जरिये मस्तिष्क के सिग्नल को एक एल्गोरिदम में बदला जाता है, जिससे एक्सोस्केलेटन को चलने का कमांड मिलता है।

    संजीवनी से कम नहीं होगी डिवाइस

    • एक्सोस्केलेटन बाहरी रूप से देखने में किसी रोबोट की आकृति लगती है
    • पर वास्तविकता में यह रोबोट नहीं है।
    • वैज्ञानिकों ने कहा कि यह डिवाइस पैरालिसिस के शिकार लोगों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं होगी।
    • इसकी मदद से लोग आसानी से चल-फिर सकेंगे और अपने दैनिक भी काम कर पाएंगे।
    • लेकिन इससे पहले इसके डिजाइन पर और काम करने की जरूरत है।

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