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Wednesday, April 22, 2026
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    एड्स पीड़ितों को बुढ़ापा पेंशन की तर्ज पर मिलेगी पेंशन

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     सरकार ने फिर किया ऐलान, क्या इस बार सिरे चढ़ पाएगी योजना?

    चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। मनोहर सरकार-2 ने फिर ऐलान किया है कि प्रदेश में एड्स पीड़ितों को बुढ़ापा पेंशन की तर्ज़ पर पेंशन मिलेगी। प्रदेश के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री ओपी यादव ने बताया कि सरकार ने एड्स पीड़ितों को पेंशन देने सम्बंधी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यादव ने कहा कि एड्स पीड़ितों की वास्तविक संख्या जानने के लिए सर्वे करवाए जा रहे हैं। वास्तविक आँकड़ा मिलने के बाद पेंशन लागु कर दी जायगी।

    • गौरतलब है कि गत वर्ष भी सरकार ने एड्स पीड़ितों के लिए पेंशन की घोषणा की थी
    • उस समय कहा गया था इन्हें बुढ़ापा और विधवा पेंशन की तर्ज पर मासिक 1800 रुपए पेंशन मिलेगी
    • साथ ही न्यूट्रिशनल सपोर्ट डाइट के लिए 500 रुपए भत्ता भी दिया जाएगा।
    • लेकिन वह योजना सिरे नहीं चढ़ी। वहीं देखना होगा कि सरकार इस बार भी सर्वे तक सीमित रहती है या इस से आगे बढ़ती है
    • गत वर्ष अक्तूबर में सरकार ने 192 एड्स पीड़ितों की पहचान की थी जिसमें 12 महिलाएँ भी शामिल थीं।

    गरीब-मजदूर तबका है एड्स का ज्यादा शिकार

    हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी की मानें तो अधिकांश रोगियों में गरीब तबका, जिसमें भारी वाहन ट्रक-टैक्सी चालक, स्लम एरिया में रहने वाले लोग, भट्ठों पर काम करने वाली लेबर सहित अन्य मजदूर वर्ग शामिल है। इसके अलावा एड्स या एचआईवी वायरस की चपेट में आने के काफी कारण हैं, लेकिन यह कोई नहीं जानता कि हेयर सैलून पर शेव बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रेजर या उस्तरा भी उक्त बीमारी का कारण बन सकता है। एचआईवी का वायरस जोकि ब्लड के माध्यम से शरीर में फैलता है।

    • अगर एचआईवी पॉजिटिव का ब्लड रेजर पर लग जाए
    • और उसका तुरंत इस्तेमाल दूसरे व्यक्ति की शेव बनाने के दौरान किया जाए
    • तो कटने के दौरान उक्त वायरस चपेट में ले सकता है।
    • ब्लड सूखने के बाद वायरस खत्म हो जाता है।

    इसलिए है पेंशन व भत्ते की जरूरत

    बेरोजगारी: एचआईवी पॉजिटिव रोगियों की पहचान होने पर उन्हें आसानी से नौकरी नहीं मिलती है। हिसार में एक रोगी को नौकरी से निकाल दिया था, जिसने न्याय के लिए लड़ाई भी लड़ी थी। इस तरह के काफी किस्से हैं, जिसके मद्देनजर कदम उठाया है। आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित नहीं होना पड़ेगा।

     

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