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    पशुओं मे थनैला रोग और लम्पी स्किन डिजीज का वैज्ञानिक प्रबंधन : डॉ. बेरवाल

    सूरतगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पशु विज्ञान केंद्र सूरतगढ़ के द्वारा डेयरी पशुओं में थनैला रोग व लम्पी स्किन डिजीज का बचाव एवं उपचार विषय पर संस्थागत प्रशिक्षण शिविर का आयोजन गुरूवार को किया गया। केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. राजकुमार बेरवाल ने आए हुए सभी पशुपालकों का स्वागत व्यक्त किया और डेयरी पशुओं में थनैला रोग को भयंकर समस्या बताते हुए कहा कि थनैला रोग एक ऐसी विशेष समस्या है, जो पशुपालकों के द्वारा दुधारू पशुओं में खराब प्रबंधन के कारण थनों में इंफेक्शन हो जाता है और इस संक्रमित दूध का सेवन करने से मनुष्य को बहुत सी बीमारियां वह नुकसान होता है, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    उन्होने थनैला रोग में पशुपालक पशुओं के आसपास साफ सफाई एवं स्वच्छ वातावरण नहीं रखते, जिसके कारण यह रोग पशुओं को अपनी चपेट में ले लेता है और पशुपालक के दुग्ध दोहन का तरीका भी सही नहीं होने के कारण यह रोग उत्पन्न हो जाता है। हमें पूर्ण हस्त विधि द्वारा दुग्ध दोहन करके इस रोग से पशुओ को बचाया जा सकता है। डॉ. बेरवाल ने पशुपालकों को बताया कि पशु विज्ञान केंद्र द्वारा दी जाने वाली जानकारीयो का महत्व समझे।

    केंद्र के डॉक्टर मनीष कुमार सेन ने बताया कि हमारे प्रदेश के पशुओं में लंम्पी स्किन डिजीज एक भयंकर बीमारी फैल चुकी है, जिसके प्रति पशुपालकों को जागरूक होना जरूरी है। यह बीमारी पशुओं में मच्छर, मक्खी और चिंचड़ो से फैलती है। पशुपालक पशु के आवास क्षेत्र में साफ सफाई रखें तथा यह बीमारी मनुष्य में नहीं फैलती परंतु एक संक्रमित पशु से दूसरे पशु में बहुत तेजी से फैलती है।

    कारण विषाणु

    उन्होने बताया कि पशु के शरीर पर गांठे बन जाना मुख्यत गर्दन, थन, जननांगों के आसपास, बुखार होना, नाक व आंख से पानी बहना तथा पशु का खाना पीना बंद हो जाना आदि लक्षण है।

    रोकथाम और नियंत्रण

    उन्होने बताया कि सबसे पहले पशुओं की साफ सफाई का ध्यान रखें, जिसमें मक्खिया, मच्छर, चिंचड़, जूं इत्यादि को पशुशाला में नहीं आए इस प्रकार का प्रबंधन करें। पशुओं में लम्पी स्किन रोग के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर पशुपालक को उपचार शुरू करना चाहिए। प्रशिक्षण शिविर में पशु विज्ञान केंद्र के द्वारा लेबोरेटरी में पीएच स्ट्रिप टेस्ट, कैलिफोर्निया मैस्टाइटिस टेस्ट (सी.एम.टी.) आदि दूध की जांच एवं मूत्रा, गोबर, खून, ब्रूसेलोसिस की निशुल्क जांच के बारे में विस्तार से बताया और इस प्रशिक्षण शिविर में कुल 35 पशुपालकों ने भाग लिया।

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