हमसे जुड़े

Follow us

11.8 C
Chandigarh
Monday, January 19, 2026
More
    Home विचार सम्पादकीय स्कूलों को जल...

    स्कूलों को जला देने से पढ़ने की सोच नहीं जल जाती

    कश्मीर में आतंक व पथराव रोजमर्रा की बात है। इससे भारतीय सुरक्षा बल अपने तरीके से निपट भी रहे हैं। लेकिन सबसे दु:खद बात है कश्मीर में स्कूलों का जलाया जाना। बुरहान वानी को मरे हुए अब पांच महीने को चुके हैं, तब से कश्मीर में स्कूलों को जलाया जा रहा है, तो अब तक करीब 32 स्कूल जल चुके हैं। यह आतंकियों की ऐसी कोशिश है, जो कश्मीर की एक पूरी पीढ़ी को अनपढ़, जाहिल बना देने पर आमादा है, जो सिर्फ कट्टरवाद की भाषा समझें। जब किसी क्षेत्र के लोग दिमागी रूप से पिछड़ जाते हैं, तब उनकी सुरक्षा, उनकी बेहतरी के लिए लड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। हालांकि कश्मीर में इस वर्ष भयंकर हिंसा में भी 94 प्रतिशत स्कूली विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल हुए, जो भारत के बच्चों की बहादुरी की मिसाल है। बच्चों का परीक्षाओं में इस हद तक शामिल होना आतंकियों को साफ संकेत है कि भले ही उनके स्कूल जला दो, लेकिन उनके पढ़ने की सोच को नहीं जला पाओगे। भारत में पहले से स्कूली स्तर पर अनेकों दुश्वारियां हैं। कहीं स्कूलों में भवन नहीं हैं, कहीं बच्चों के लिए पीने का पानी व शौचालय नहीं है। अनेकों स्कूल ऐसे भी हैं, जहां पूरे अध्यापक या शिक्षण सामग्री नहीं है। जब मामला कश्मीर जैसे अशांत एवं दुर्गम क्षेत्रों का हो तो तकलीफें और भी ज्यादा हैं। ऐसे में आतंकियों का स्कूलों पर चोरी-छिपे हमले करना, उन्हें जलाते जाना बेहद गंभीर चुनौती है। राज्य के सुरक्षा तंत्र व केन्द्रीय सुरक्षा संगठनों को इस ओर विशेष ध्यान देना होगा। यहां सबसे पीड़ादायक बात यह है कि इन स्कूलों को राख बनाने वाले लोग भी उन्हीं स्कूलों के आसपास के कुछ बुरहान वानी होंगे। लेकिन उन लोगों को समझना होगा कि वह जिन लोगों की आजादी की लड़ाई का दम भरते हैं, उन्हें ही अनपढ़ क्यों रखना चाह रहे हैं? इन स्कूलों में उनके ही छोटे भाई-बहन पढ़ते हैं। ये स्कूल उन्हीं के बाप-दादाओं की खून-पसीने की कमाई से बने हैं। स्कूल जलाने वालों को यदि पाकिस्तान की सहायता पर भरोसा है, तब उन्हें यह भी देखना होगा कि स्वयं पाकिस्तान में स्कूलों, अस्पतालों, गांवों-कस्बों के क्या हालात हैं। खैर अगर जलाने वालों को अपनों की इतनी ही फिक्र हो, तो वह ऐसा करें ही क्यों। लेकिन केन्द्र व राज्य सरकार को चाहिए कि वह जलाए गए स्कूलों को सेना की सहायता से पुन: रातों-रात बनाना शुरु करें, ताकि जो लोग शिक्षा के विरोधी हैं, उन्हें सबक सिखाया जा सके कि वह लाख यत्न कर लें, लेकिन कश्मीरियों की तरक्की व अमन को वह मिटा नहीं पाएंगे।

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here