मुख्यमंत्री बता रहे 5% व विपक्ष बता रहा 29% से अधिक बेरोजगारी

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Unemployment-In-Haryana

 बेरोजगारी के आंकड़ों में उलझन

  • हजारों पदों की भर्तियां परीक्षा और परिणाम के कारण रूकी

सच कहूँ, देवीलाल बारना कुरुक्षेत्र। हरियाणा में बेरोजगारी के आंकड़ों को लेकर उलझन पैदा हो रही है। विपक्ष जहां हरियाणा में बेरोजगारी के आंकडे 30 प्रतिशत दर्शा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री हरियाणा में सिर्फ 5 या 6 प्रतिशत ही बेरोजगारी बता रहे हैं। विपक्ष बार-बार बेराजेगारी को लेकर सरकार को घेरने का कार्य कर रहा है। बेरोजगारी के मामले में मुख्यमंत्री पिछले तीन दिनों में दो बार ब्यान दे चुके हैं। गत वर्ष सीएमआईई की रिपोर्ट ने उस वक्त हंगामा मचा दिया, जब रिपोर्ट में बताया कि गया कि हरियाणा 33.5 प्रतिशत के साथ बेरोजगारी में नंबर एक प्रदेश है। ऐसे में विपक्ष का हंगामा मचाना भी लाजमी ही था। 8 जून को मुख्यमंत्री ने सीएमआईई को विपक्ष द्वारा संचालित संस्था करार दे दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें डायरेक्टर जैसे पदों पर बैठे लोग विपक्ष से जुड़े हुए हैं और स्टेट को बदनाम करने की साजिश है।

प्रदेश में साढे 8 लाख लोग बेराजगार : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हरियाणा में बेरोजगारी दर को लेकर कहा है कि विपक्ष मनघडंत आरोप लगा रहा है। प्रदेश में कुल साढेÞ 8 लाख लोग बेरोजगार हैं, जिसमें से ढाई लाख लोग ऐसे हैं, जिनके पास अपनी प्रोपर्टी या अन्य साधनों से अच्छी आय है। प्रदेश में 6 लाख लोग ऐसे हैं, जिनकी 1 लाख 80 हजार से कम इनकम है। प्रदेश सरकार इन लोगों के लिए भी योजना तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर प्रदेश में 5 से 6 प्रतिशत तो बेरोजगारी होती ही है। वहीं 8 जून को मुख्यमंत्री ने ब्यान दिया था कि प्रदेश में 2 करोड़ जनता है। 2 करोड़ लोगों मे से 5 या 6 लाख लोग ही बेरोजगार हैं। ढाई प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने पढ़ाई पूरी कर ली व नौकरी ढूंढ रहे हैं या फिर एक नौकरी को छोड़कर दूसरी नौकरी ढूंढ रहे हैं।

‘सभी को सरकारी नौकरी संभव नहीं’

मुख्यमंत्री का यह भी कहना है कि प्रदेश की दो करोड़ जनता में से विभिन्न विभागों में 3 से 4 लाख लोगों को ही सरकारी नौकरी मिल सकती है। इसके अलावा जो हैं वे या तो अपना कारोबार करेंगे या फिर प्राईवेट नौकरी करेंगे।

युवाओं को नौकरी का झांसा देकर बनी है भाजपा-जजपा सरकार : सैलजा

हरियाणा कांग्रेस अध्यक्षा कुमारी सैलजा ने कहा कि युवाओं को नौकरियों का झांसा देकर सरकार बनाने वाली भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार ने प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने की बजाय उनको बेरोजगार करके घर में बैठा दिया है। सरकार ने नौकरियां निकालने का ढिंढोरा तो पीटा, लेकिन एक भी युवा को रोजगार नहीं दे पाई। यही कारण है कि आज प्रदेश की बेरोजगारी दर 29 फीसदी तक पहुंच गई है। जबकि सरकार कह रही है कि उन्होंने लाखों युवाओं को नौकरियां दी हैं।

दो साल में 30 हजार पदों के लिए निकली भर्तियों को अटकाया

कुमारी सैलजा का कहना है कि सरकार ने 7 भर्तियां रद्द करके पहले तो हजारों युवाओं को घर बैठाया है। वहीं दो साल में 30 हजार पदों के लिए निकली विभिन्न भर्तियों को अटकाया हुआ है। इन पदों की भर्ती परीक्षा न होने और परिणाम न आने के कारण अटकी हुई है। इन भर्तियों के लिए पांच लाख से ज्यादा युवाओं ने आवेदन कर रखा है। सैलजा ने तंज कसा कि सरकार तो कांस्टेबल के 7298 पदों की विज्ञप्ति जारी करके आवेदन लेना ही भूल गई है। वहीं बिजली विभाग के 2978 पदों की कुछ आवेदकों की परीक्षा ली गई, कुछ की नहीं, हेल्थ विभाग के 4322 पदों की परीक्षा अभी तक सरकार ने अटका रखी है। इसी प्रकार पटवारी, सब इंस्पेक्टर व कैनाल पटवारी के पदों की परीक्षा अभी तक नहीं ली गई है।

सालों नौकरी के बाद भर्ती रद्द

पीटीआई के 1983 पद ऐसे हैं, जिन्होंने सालों नौकरी भी की है, लेकिन उन्हें हटा दिया गया। इसके अलावा ड्रार्इंग टीचर के 816 पदों पर कार्य कर रहे शिक्षकों को भी हटा दिया गया। इसके अलावा खेल कोटा गु्रप ‘डी’ के 1518 पद रद्द कर दिया गया है। वहीं जूनियर लेक्चरर असिस्टेंट के 61 पद, पीजीटी संस्कृत के 626 पद व टीजीटी अंग्रेजी के 1035 पदों की भर्ती को रद्द कर दिया गया है।
काफी भर्तियां ऐसी भी हैं जो बीच में ही लटकी हुई हैं। जिनमें से कईयों के पेपर रद्द हो गए हैं। कुछ कोर्ट में अटकी हैं, कई भर्तियों के परिणाम नही आया और कई भर्तियों के परिणाम अटके हुए हैं।

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