पराली मामला: किसानों को बदलना होगा तरीका

Pollution

आज प्रदूषण नेशनल नहीं इंटरनेशनल मुद्दा है। कई देशों के लिए चुनौती बना यह मुद्दा (Pollution) हमारे देश के लिए बहुत बड़ा है। तमाम चीजों की वजह से हम परेशान हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से सर्दी के मौसम में पराली जलाने से लोगों की जान और आफत में आ रही है। इस मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार गंभीर है। पराली से प्रदूषण न हो इसके उपाय निकाले जा रहे हैं, लेकिन किसान उन चीजों का पालन न करके अपने व अपनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सरकार ऐसी मशीन लेकर आई है जो पराली के छोटे-छोटे टुकडेÞ करके मिट्टी में मिला देती है जिससे बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं होता। सरकार इन मशीनों पर 50 से 80 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है लेकिन कोई भी किसान इसमें रुचि नहीं ले रहा जो बेहद दुर्भागपूर्ण है। सरकार ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब के साथ अब दिल्ली को भी पराली बगैर जलाए नष्ट करने के उपाय वाले राज्यों में संग्लित कर लिया। जैसा कि दिल्ली में करीब तीस हजार हेक्टयेर खेती की जमीन है जिस पर बीस हजार किसान है और उन सभी को सब्सिडी देने का फैसला लिया है जो किसान और हमारे लिए एक अच्छी खबर है। अकेले दिल्ली के साढ़े चार करोड़ का बजट पारित किया है।

आपको ज्ञात हो दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश में कुछ ऐसे राज्य हैं जहां सर्दियों (Pollution) में आखों में ऐसा लगता है मानों किसी ने मिर्च ड़ाल दी हो। बच्चों व अस्थमा के मरीजों के लिए तो यह समय काल बन जाता है। इसके अलावा सबसे अहम बात यह है कि अब तक हम स्कूल के बच्चों की सर्दी व गर्मी की छुट्टियां सुनते आए थे लेकिन लगभग पिछले चार-पांच सालों से प्रदूषण की छुट्टियां प़ड़ने लगी हैं। पहले से ही हम प्रदूषण की समस्या से किस स्तर पर जूझ रहे हैं यह सब भलिभांति जानते हैं बावजूद इसके हम सुधरना नहीं चाहते।

शोधकतार्ओं के अनुसार पराली से निकलने वाला धुआं स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इससे वायुमंडल में कार्बन डाईआॅक्साइड, कार्बन मोनोआॅक्साइड और मिथेन गैसों की बहुत अधिक मात्रा बढ़ जाती है। पंजाब व हरियाणा मे जलाई पराली का असर सबसे ज्यादा दिल्ली में पड़ने लगा है। पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में पराली को न जलाने के लिए उसको नष्ट करने के उपाय के लिए गांवों में स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से पंपलेट भी बंटवाए।संबंधित विभाग की तरफ से मोबाइल वैन चलाई गई थी। इस में कृषि विभाग के अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से किसानों को जागरुक भी किया था। किसानों ने बढ़-चढ़कर भाग भी लिया लेकिन जब इस पर काम करने की बारी आई तो धरातल पर सब शून्य लगा।

हम लोगों की एक अद्भूत विडबंना है कि जो चीज सरकार हमें आसानी से दे देती है हम उसकी कीमत नहीं समझते है और हमें लगता है कि इसमें न जाने सरकार का क्या लालच है? हक के आंदोलन में नंबर वन कहे जाने वाले हमारे देश के किसान भाईयों को यह समझना चाहिए कि यदि जिस काम को करने से हर किसी का फायदा हो रहा है खासतौर पर स्वास्थय को लेकर,तो उसमें हमें प्रथम दर्जा देते हुए भागीदारी निभानी चाहिए। यदि सरकार कोई कार्य न करे तो वह गुनहागार बन जाती है और जब वो किसी भी चीज में सरलता लाकर हमारा ही भला कर रही है तो उसमें भी हमें समस्या है। जैसा कि आज प्रदूषण हमारा मुख्य मुद्दा बनता जा रहा है।

पहले मनुष्य की आयु सौ वर्ष होती थी जो अब घटकर साठ ही रह गई और जिस हिसाब से हम अप्राकृतिक चीजों के आदि बनते जा रहे हैं उससे आने वाले समय में खतरा और बढ़ जाएगा। देश की आजादी से लेकर आज तक किसानों को लेकर तमाम मुद्दे रहे हैं और इनको संतुष्ट करना किसी भी सरकार के लिए चुनौती होती है। हर सरकार किसानों की सुविधा व आय के लिए काम करती आई है लेकिन आज दौर बदल गया, आज विपक्ष या अन्य दल किसानों की समस्याओं को बेच कर उन पर राजनीति करते हैं। किसानों को समझाने की बजाए उनको भड़काया जाता है। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार पराली वाले मामले में भी शायद भड़काया जा रहा हो। हांलांकि जब किसी मामले की प्रमाणिकता न हो तो किसी पर आरोप नहीं लगा सकते लेकिन किसानों का पराली से प्रदूषण फैलने पर सजग न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

हम लेख के माध्यम से किसान भाईयों से अपील करते हैं कि सरकार द्वारा इस सुविधा का उपयोग करते हुए मौजूदा व आने वाली पीढ़ी को बचाने का प्रयास करें। महानगरों में तो पहले से ही तमाम तरह की समस्याएं हैं जिससे यहां स्वस्थ रहना पहले से ही मुश्किल पड़ रहा है। आपके इस कदम से करोड़ों लोगों की जिंदगी स्वस्थ रह सकती हैं। केंद्र के साथ मिलकर सभी राज्य सरकारें इसमें अपनी भागीदारी दिखा रही हैं तो आपको भी अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए क्योंकि मामला स्वास्थय से जुड़ा है। यदि आज हमने इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई तो निश्चित तौर पर इसके कई दुष्परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
योगेश सोनी

 

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करे।