परंपरागत खेती की बजाय आधुनिक खेती अपनाने के लिए जागरूक कर रही सरकार

Modern-Farming

 देश भर में हैं कुल 34 इंडों-इजराईल प्रोजेक्ट (Modern Farming) 

  •  हरियाणा में सर्वाधिक 6 प्रोजेक्ट, अकेले कुरुक्षेत्र में दो

सच कहूँ, देवीलाल बारना कुरुक्षेत्र। यदि आप भी बागवानी के शौकीन हैं तो धर्मनगरी के लाडवा में बनाया गया सेंटर फॉर सब-ट्रॉपिकल फ्रुट (इंडो-इजराईल प्रोजेक्ट) आपके लिए फायदेमंद सिद्ध हो सकता है। यहां आपको हर प्रकार के फलों के पौधे मिलते हैं। इतना ही नहीं फलों के पौधों की किस्मों पर यहां उच्च स्तरीय रिसर्च की जाती है और विभिन्न किस्मों को तैयार किया जाता है। यहां से पौधे ले जाकर किसान धान-गेहूं जैसी पारंपरिक खेती को छोड़कर बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बता दें कि भारत की खेती तकनीक में सुधार लाने के लिए इजराइल और भारत के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता हुआ है। दरअसल, भारत में खेती और किसानों की तरक्की के लिए इजराइल के योगदान को कभी नकारा नहीं जा सकता।

ये है संरक्षित खेती

संरक्षित खेती में एक नियंत्रित वातावरण में फसलें उगाई जाती हैं। इसमें ग्रीन हाउस, कीट अवरोधी नेट हाउस, प्लास्टिक लो-हाई टनल और ड्रिप इरीगेशन का इस्तेमाल होता है। इसमें किसानों को ऐसी तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी मिली, जिससे जलवायु परिवर्तन के बावजूद फसल उत्पादन पर कोई असर न पड़े।

देवगौड़ा शासनकाल में डाली गई थी नींव

बता दें कि दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में आपसी सहयोग की मजबूत नींव एचडी देवगौड़ा के शासनकाल में डाली गई थी। तब देश के कृषि मंत्री सीपीआई नेता चतुरानन मिश्र थे। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा में बना संरक्षित कृषि प्रौद्योगिकी केंद्र इसकी मिसाल है। पूसा परिसर में 31 दिसंबर 1996 को इजराइल के राष्ट्रपति इजर वाइजमैन ने भारत-इजराइल कृषि प्रौद्योगिकी मूल्यांकन एवं हस्तांतरण केंद्र की आधारशिला रखी थी।

देश भर में यहां हैं सेंटर आॅफ एक्सीलेंस

देशभर में अलग-अलग राज्यों में इंडो-इजराईल प्रोजेक्ट के 29 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसमें से सबसे ज्यादा 4 प्रोजेक्ट हरियाणा में हैं और दो प्रोग्रेस में हैं। वहीं कुरुक्षेत्र एकमात्र जिला है, जहां दो सैंटर हैं।

1. सब ट्रॉपिकल फ्रुट्स लाडवा (कुरुक्षेत्र)
2. मधुमक्खी पालन विकास रामनगर (कुरुक्षेत्र)
3. फ्रुट्स सरसा 4. वेजीटेबल घरौंडा (करनाल)
4. वेजीटेबल, साबरकांठा (गुजरात)
5. खजूर की खेती, कच्छ (गुजरात)
6. केसर आम, जूनागढ़ (गुजरात)
7. आम, रत्नागिरी (महाराष्ट्र)
8. खट्टे फल (नीबू, संतरा), अकोला, नागपुर
9. अनार, अहमदनगर (महाराष्ट्र)
10. केसर आम, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
11. वेजीटेबल, करतारपुर (पंजाब)
12. खट्टे फल, होशियारपुर (पंजाब)
13. खारे पानी का उपचार, बठिंडा (पंजाब)
14. किन्नू और नारंगी, कोटा (राजस्थान)
15. अनार, जयपुर (राजस्थान)
16. खजूर, जैसलमेर (राजस्थान)
17. आम, कोलार (कर्नाटक)
18. अनार, बागलकोट (कर्नाटक)
19. वेजीटेबल, धारवाड़ कर्नाटक
20. आम और लीची, वैशाली (बिहार)
21. वेजीटेबल, नालंदा (बिहार)
22. फूल, कृष्णागिरी (तमिलनाडु)
23. सब्जियां, डिंडीगुल (तमिलनाडु)

24. फल, बस्ती (उत्तर प्रदेश)
25. सब्जियां, कन्नौज (उत्तर प्रदेश)
26. फल, लुंगलेई (मिजोरम)
27. फल और सब्जियां, कुप्पम (आंध्र प्रदेश)

अंडर प्रोग्रेस कार्य (Modern Farming))

1. फल की खेती और बीज उत्पादन, झज्जर (हरियाणा)
2. अर्ध शुष्क बागवानी, भिवानी (हरियाणा)
3. वेजीटेबल, मुरैना (मध्य प्रदेश)
4. संतरा, छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)
5. सब्जियां (असम)

अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और TwitterInstagramlink din , YouTube  पर फॉलो करें।