अब नहीं ली तो कब लेंगे सीख?
जब मनुष्य प्राकृति से छेड़छाड़ की हदों को पार करेगा तब प्राकृति का प्रकोप बर्दाश्त करना पड़ता है। प्राचीन ग्रंथ महाविज्ञान हैं जो मनुष्य का न केवल रूहानी नेतृत्व करते हैं बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य का रास्ता भी बताते हैं।


























