Education News: बच्चे का स्कूल एडमिशन किस उम्र में कराएं? जानिए कक्षा 1 और प्री-स्कूल के लिए उम्र का नियम

बच्चे का स्कूल एडमिशन किस उम्र में कराएं? जानिए कक्षा 1 और प्री-स्कूल के लिए उम्र का नियम

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Education News:  नई दिल्ली: बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के मन में उसकी पढ़ाई को लेकर कई सवाल आते हैं। इनमें सबसे अहम सवाल होता है कि बच्चे को स्कूल भेजने की सही उम्र क्या है। कुछ माता-पिता बच्चे को कम उम्र में ही स्कूल भेज देते हैं, जबकि कई परिवार 5 या 6 साल की उम्र तक इंतजार करते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि प्री-स्कूल और कक्षा 1 में प्रवेश के लिए उम्र को लेकर क्या व्यवस्था है।

कक्षा 1 में कितनी होनी चाहिए बच्चे की उम्र?

नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत स्कूली शिक्षा के लिए 5+3+3+4 का ढांचा अपनाया गया है। इसमें शुरुआती पांच साल फाउंडेशनल स्टेज के होते हैं। इसमें 3 साल की प्री-स्कूल/आंगनवाड़ी शिक्षा के बाद कक्षा 1 और 2 शामिल हैं।

कक्षा 1 में प्रवेश के लिए 6 साल की उम्र को महत्व दिया गया है। हालांकि, CBSE से जुड़े स्कूलों में प्रवेश की उम्र राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के लागू नियमों के अनुसार भी निर्धारित हो सकती है। इसलिए बच्चे का एडमिशन कराने से पहले संबंधित स्कूल और अपने राज्य के मौजूदा नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

प्री-स्कूल में कब कराएं एडमिशन?

बच्चे की शुरुआती स्कूली शिक्षा आमतौर पर प्री-स्कूल से शुरू होती है। CBSE ने अपने स्कूलों में प्री-स्कूल के पहले वर्ष में 3 साल से कम उम्र के बच्चे को प्रवेश नहीं देने की व्यवस्था की है।

यानी लगभग 3 साल की उम्र से बच्चे की औपचारिक शुरुआती शिक्षा शुरू हो सकती है। इसके बाद बच्चे की उम्र और स्कूल की व्यवस्था के अनुसार प्री-स्कूल के अलग-अलग स्तर पूरे करने के बाद कक्षा 1 में प्रवेश दिया जाता है।

3 से 6 साल की उम्र क्यों महत्वपूर्ण है?

3 से 6 साल की उम्र बच्चे के मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और भाषा विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस उम्र में बच्चों को सिर्फ किताबों और लिखने-पढ़ने तक सीमित रखने के बजाय खेल, गतिविधियों, बातचीत और अनुभवों के जरिए सीखने का अवसर देना महत्वपूर्ण है।

NEP 2020 के फाउंडेशनल स्टेज में भी बच्चों की उम्र और विकास के स्तर के अनुरूप सीखने पर जोर दिया गया है। इस दौरान बच्चे की जिज्ञासा, भाषा कौशल, सामाजिक व्यवहार और बुनियादी समझ विकसित करने वाली गतिविधियां ज्यादा उपयोगी होती हैं।

सिर्फ उम्र नहीं, बच्चे की तैयारी भी देखें

बच्चे को स्कूल भेजने का फैसला सिर्फ उसकी उम्र देखकर नहीं किया जाना चाहिए। माता-पिता को यह भी देखना चाहिए कि बच्चा स्कूल के माहौल के लिए कितना तैयार है। उदाहरण के लिए, क्या वह कुछ समय माता-पिता से अलग रह सकता है, अपनी सामान्य जरूरतें बता सकता है, दूसरे बच्चों के साथ बातचीत कर सकता है और नई गतिविधियों में रुचि लेता है।

इसलिए सही उम्र के साथ-साथ बच्चे की स्कूल रेडीनेस और संबंधित राज्य/स्कूल के प्रवेश नियम को ध्यान में रखना जरूरी है। जल्दबाजी में एडमिशन कराने के बजाय बच्चे की उम्र और विकास के अनुरूप शुरुआती शिक्षा देना उसके सीखने के अनुभव को बेहतर बना सकता है।

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