Car Loan: EMI नहीं भरी तो बैंक ऐसे नहीं छीन सकता आपकी गाड़ी, सुप्रीम कोर्ट ने बताई कानूनी प्रक्रिया
EMI नहीं भरी तो बैंक ऐसे नहीं छीन सकता आपकी गाड़ी, सुप्रीम कोर्ट ने बताई कानूनी प्रक्रिया
नई दिल्ली। Car Loan: आज के समय में कार, बाइक, ट्रक या दूसरी कमर्शियल गाड़ी खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग बैंक या फाइनेंस कंपनी से लोन लेते हैं। इस लोन की रकम हर महीने EMI के जरिए चुकाई जाती है। लेकिन आर्थिक परेशानी या किसी अन्य कारण से अगर EMI समय पर नहीं भर पाती, तो ग्राहक और फाइनेंस कंपनी के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है।
ऐसे मामलों में फाइनेंसर के पास बकाया रकम की वसूली के लिए कानूनी अधिकार हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि रिकवरी एजेंट सड़क पर गाड़ी रोककर या बल प्रयोग करके उसे अपने कब्जे में ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वाहन की जब्ती कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए।
क्या EMI नहीं भरने पर बैंक गाड़ी जब्त कर सकता है?
हां, लगातार डिफॉल्ट की स्थिति में लोन एग्रीमेंट और लागू कानूनों के तहत फाइनेंसर को वाहन वापस लेने का अधिकार हो सकता है। लेकिन गाड़ी जब्त करने का तरीका कानून के मुताबिक होना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार बैंक और वित्तीय संस्थान बकाया वसूलने के लिए रिकवरी एजेंटों या किसी अन्य व्यक्ति के जरिए बल, धमकी या दबाव का इस्तेमाल नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल लोन एग्रीमेंट में वाहन वापस लेने की शर्त होने से फाइनेंस कंपनी को मनमाने तरीके से वाहन उठाने की अनुमति नहीं मिल जाती।
रात में गाड़ी ले जाने का मामला भी आया सामने
एक मामले में वाहन मालिक ने आरोप लगाया था कि उसकी गाड़ी को बिना उचित नोटिस के रात करीब 1 बजे ले जाया गया और स्टीयरिंग लॉक तोड़कर कब्जे में लिया गया। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे गए तथ्यों में यह भी सामने आया कि वाहन को बाद में बेच दिया गया था। कोर्ट ने ऐसे तरीके को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना।
अदालत ने स्पष्ट किया कि फाइनेंसर को अपनी बकाया रकम वसूलने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल बल या गैरकानूनी तरीके से नहीं किया जा सकता।
रिकवरी एजेंटों के लिए भी नियम तय
RBI के दिशा-निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के मुताबिक लोन की वसूली के दौरान ग्राहकों को अनुचित तरीके से परेशान नहीं किया जाना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि उनके द्वारा नियुक्त रिकवरी एजेंट लागू नियमों का पालन करें।
इसका मतलब है कि रिकवरी एजेंट धमकी, डराने-धमकाने, जबरदस्ती या सड़क पर वाहन रोककर कब्जा करने जैसे तरीके नहीं अपना सकते। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे बलपूर्वक तरीकों को पहले भी अस्वीकार किया है।
गाड़ी मालिकों को क्या करना चाहिए?
अगर आपकी EMI बकाया हो गई है, तो मामले को नजरअंदाज करने के बजाय बैंक या फाइनेंस कंपनी से संपर्क करना बेहतर है। बकाया रकम, नोटिस और वाहन की संभावित जब्ती से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी लें।
अगर कोई रिकवरी एजेंट कानून के बाहर जाकर धमकी देता है या जबरदस्ती वाहन कब्जे में लेने की कोशिश करता है, तो घटना के रिकॉर्ड सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लेना महत्वपूर्ण हो सकता है।
ध्यान रखें कि सुप्रीम कोर्ट का संदेश यह नहीं है कि EMI डिफॉल्ट होने पर फाइनेंस कंपनी गाड़ी कभी जब्त नहीं कर सकती। फाइनेंसर का बकाया वसूलने का अधिकार और वाहन को जबरन छीनने का तरीका—दो अलग-अलग बातें हैं। वैध अधिकार का इस्तेमाल भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही किया जाना चाहिए।