मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग से निपटने को सीमा-पार सहयोग जरूरी: के. स्वर्णांबिका

सीखी गई जांच तकनीकों और अनुभवों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लागू करें:प्रकाश सिंह

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गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad News: मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के लिए फंडिंग से निपटने के लिए सीमा-पार सहयोग और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। अपराध अब किसी एक देश तक सीमित नहीं रहते और कम समय में कई देशों तक फैल जाते हैं। ऐसे में वित्तीय अपराधों की जांच के लिए विभिन्न देशों की खुफिया और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और पेशेवर नेटवर्क मजबूत करना समय की जरूरत है। यह जानकारी सीडीटीआई प्रवक्ता ब्रह्मपाल सिंह बालियान ने दी। उन्होंने  बताया कि ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी), सेंट्रल डिटेक्टिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (सीडीटीआई), गाजियाबाद की ओर से 7 से 11 सितंबर तक ‘मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और आतंकवाद के लिए फंडिंग से निपटने’ विषय पर क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इसमें भारत के अलावा बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल और श्रीलंका के कुल 18 अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों में वित्तीय खुफिया इकाई, गृह मंत्रालय, पुलिस, रक्षा सेवाओं और विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी शामिल रहे। कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश एवं सीमा सुरक्षा बल के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह (आईपीएस, सेवानिवृत्त) ने अधिकारियों को संबोधित  करते हुए  कहा कि मौजूदा दौर में अपराध की शुरुआत एक देश में होकर कुछ ही समय में कई महाद्वीपों तक पहुंच सकती है। इससे वित्तीय अपराधों की जांच और रोकथाम कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान साझा किए गए विषयों को महत्वपूर्ण बताते हुए अधिकारियों से सीखी गई जांच तकनीकों और अनुभवों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए।सीडीटीआई गाजियाबाद की निदेशक के. स्वर्णांबिका  ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग अब किसी एक सीमा या अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न देशों की खुफिया एजेंसियों, संस्थानों और जांचकर्ताओं के बीच मजबूत जुड़ाव आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की सफलता केवल प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि नई जांच तकनीकों को अमल में लाने, आपसी विश्वास कायम करने और पेशेवर नेटवर्क मजबूत करने में दिखनी चाहिए।

उन्होंने प्रतिभागियों से भविष्य में भी अपराध के बदलते तरीकों, जांच के अनुभवों और कार्यप्रणाली को साझा करते रहने का आग्रह किया, ताकि अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सीमा-पार खामियों से अधिक मजबूत आपसी सहयोग के जरिए निपटा जा सके। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम के आयोजन की सराहना करते हुए प्रशिक्षण सत्रों, सहयोगी माहौल और सीडीटीआई के अधिकारियों-कर्मचारियों के व्यवहार की प्रशंसा की। कार्यक्रम के समापन के साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग के खिलाफ क्षमता निर्माण, ऑपरेशनल सहयोग और पेशेवर नेटवर्किंग को मजबूत करने के साझा प्रयासों को नई दिशा मिली।

 

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