School Bicycle Fairs: साइकिल मेले से छुटकारे की तैयारी, अब सीधे स्कूल पहुंचेगी साइकिलें!

साइकिल के लिए महीनों इंतजार से मिलेगी राहत! शिक्षा विभाग कर रहा नई व्यवस्था पर मंथन

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सरसा (सच कहूँ न्यूज)। School Bicycle Fairs: साइकिल मेले में निर्धारित बजट में पसंद की साइकिल नहीं मिलना और बजट के लिए महीनों इंतजार करना..., अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की इन परेशानियों को देखते हुए शिक्षा विभाग अब साइकिल वितरण की प्रक्रिया बदलने पर विचार कर रहा है। जिला स्तर पर लगने वाले साइकिल मेलों की जगह पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए निदेशालय स्तर पर एक साथ साइकिल खरीदने के प्रस्ताव पर मंथन किया जा रहा है। फिलहाल स्कूलों को साइकिल के लिए पात्र और अपात्र विद्यार्थियों का डाटा एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।

मेले में पसंद की साइकिल के लिए देने पड़ते थे अतिरिक्त पैसे

मेरी पसंद, मेरी साइकिल योजना के तहत जिला स्तर पर मेले लगाए जाते हैं। इन मेलों में विभिन्न विक्रेता साइकिल लेकर पहुंचते हैं। विद्यार्थी और अभिभावक अपनी पसंद की साइकिल चुनते हैं। विभाग की ओर से 2800 और 3000 रुपए की राशि निर्धारित है, लेकिन अभिभावकों का कहना है कि इस राशि में उनकी पसंद की साइकिल उपलब्ध नहीं होती। मजबूरी में उन्हें अतिरिक्त रकम अपनी जेब से देनी पड़ती है।

छठीं, नौवीं और 11वीं के विद्यार्थियों को लाभ

योजना के तहत छठीं, नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को साइकिल दी जाती है। इसके लिए घर से स्कूल की दूरी दो किलोमीटर से अधिक होना जरूरी है। विभाग का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को आवागमन की सुविधा देना है, जिन्हें स्कूल पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

एक साथ खरीद हुई तो गुणवत्ता सुधरने की उम्मीद

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि पूरे प्रदेश के लिए एक साथ साइकिल खरीदने पर बड़ी संख्या में खरीद का लाभ मिलेगा। इससे तय राशि में बेहतर गुणवत्ता की साइकिल उपलब्ध करवाने की संभावना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों और अभिभावकों को साइकिल मेले में जाने और विक्रेताओं के बीच चयन करने की प्रक्रिया से भी राहत मिलेगी। हालांकि, निदेशालय स्तर पर खरीद की व्यवस्था अभी प्रस्तावित है और इस संबंध में अंतिम निर्णय होना बाकी है।

समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयक कृष्ण कुमार वर्मा ने बताया कि स्कूलों से साइकिल योजना के पात्र और अपात्र विद्यार्थियों का डाटा एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। आगे की प्रक्रिया डाटा मिलने के बाद तय की जाएगी।

छह महीने बाद मिलता था बजट

अभिभावकों के सामने दूसरी बड़ी परेशानी साइकिल मिलने में होने वाली देरी की थी। कई मामलों में मेला आयोजित होने के बाद करीब छह महीने तक बजट का इंतजार करना पड़ता था। बजट जारी होने के बाद ही विद्यार्थियों को मेले में चयनित साइकिल मिल पाती थी। इससे योजना का लाभ मिलने में भी देरी होती थी।

 

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