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Anthropic Resignation: ‘एआई मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा’, Anthropic के रिसर्चर जैकब कॉक्सन की चेतावनी
एंथ्रोपिक रिसर्चर ने दिया इस्तीफा
Anthropic Resignation: सैन फ्रांसिस्को (सच कहूँ/एजेंसी)।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विकसित होते दौर के बीच युवा रिसर्चर जैकब कॉक्सन का Anthropic से इस्तीफा चर्चा का विषय बन गया है। कंपनी छोड़ने के बाद कॉक्सन ने AI उद्योग में चल रही प्रतिस्पर्धा और भविष्य में विकसित होने वाली अत्यधिक सक्षम प्रणालियों को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
कॉक्सन का कहना है कि AI कंपनियां ऐसे सिस्टम तैयार करने की दिशा में तेजी से बढ़ रही हैं, जो आने वाले वर्षों में मानव समाज के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। उनके मुताबिक, तकनीक के विकास की रफ्तार और उससे जुड़े संभावित जोखिमों के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
OpenAI और Anthropic में कर चुके हैं काम
कॉक्सन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने पिछले करीब तीन वर्षों में OpenAI और Anthropic दोनों में प्री-ट्रेनिंग रिसर्च पर काम किया है। उनका मुख्य काम बड़े AI मॉडल्स को भारी मात्रा में डेटा के जरिए प्रशिक्षित करने से संबंधित रहा है। अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने मौजूदा AI दौड़ की दिशा पर चिंता जताई है।
कॉक्सन के अनुसार, AI कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं जो भविष्य में अपनी क्षमताओं को खुद बेहतर बनाने में सक्षम हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसी तकनीक को विकसित करने की गति पर्याप्त सुरक्षा और समझ के साथ आगे बढ़ रही है। उनका मानना है कि यदि AI सिस्टम इंसानों से बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में पहुंचते हैं, तो उनका प्रभाव केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रह सकता। साइबर सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वास्तविक दुनिया के संसाधनों पर इसका असर पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
AI के संभावित खतरे पर उद्योग में भी चिंता
कॉक्सन ने दावा किया कि AI क्षेत्र में काम करने वाले कुछ शोधकर्ता और वरिष्ठ अधिकारी निजी तौर पर इस तकनीक के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर काफी चिंतित हैं। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि अगर जोखिमों को लेकर चिंता मौजूद है तो AI का विकास इतनी तेजी से क्यों जारी रखा जा रहा है।
उनके मुताबिक, अलग-अलग AI कंपनियों में जोखिम को लेकर नजरिया एक जैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ संस्थानों में खतरे को ज्यादा गंभीरता से समझा जाता है, लेकिन प्रतिस्पर्धा से पीछे छूटने की आशंका विकास की गति को प्रभावित कर रही है। कॉक्सन ने AI उद्योग में मौजूद उस सोच की आलोचना की, जिसके तहत कोई कंपनी सुरक्षा कारणों से विकास की रफ्तार कम करती है तो उसे डर रहता है कि दूसरी कंपनी बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के आगे निकल सकती है।
उनके अनुसार, यही प्रतिस्पर्धी दबाव कंपनियों को अधिक शक्तिशाली AI सिस्टम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने शोधकर्ताओं से अपील की कि केवल तकनीकी प्रगति को अपरिहार्य मानकर आगे बढ़ने के बजाय AI सुरक्षा के नियमों और मानकों पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
शोधकर्ताओं से आत्ममंथन की अपील
कॉक्सन ने AI वैज्ञानिकों के सामने एक अहम सवाल रखा कि क्या ऐसे सुपरइंटेलिजेंट सिस्टम को प्रशिक्षित करना उचित है, जिनके आंतरिक व्यवहार और निर्णय लेने की प्रक्रिया को इंसान अभी पूरी तरह नहीं समझते। उन्होंने AI लैब्स में काम करने वाले शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि मौजूदा दौर को केवल तकनीकी दौड़ के रूप में न देखा जाए। उनके अनुसार, यही समय है जब विकास की सीमाओं, सुरक्षा प्रोटोकॉल और जिम्मेदार AI निर्माण को लेकर ठोस फैसले किए जा सकते हैं।
कॉक्सन ने बताया कि AI क्षेत्र में कुछ लोग मौजूदा प्रतिस्पर्धा को ‘क्रंचटाइम’ और ‘एंडगेम’ जैसे शब्दों से भी परिभाषित कर रहे हैं। उनका मानना है कि इन शब्दों से पता चलता है कि उद्योग का एक वर्ग अत्यधिक सक्षम और आत्म-सुधार करने वाले AI मॉडल्स के विकास को निर्णायक चरण के तौर पर देख रहा है। इसके अलावा, कॉक्सन उन 1,000 से अधिक AI शोधकर्ताओं में भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर सरकारों के बीच AI से जुड़े मुद्दों पर बेहतर समन्वय की मांग करने वाले एक बयान का समर्थन किया था।