पांच साल के बेटे ने दी शहीद सुखचैन सिंह को मुखाग्नि, नम आंखों से ग्रामीणों ने दी अंतिम विदाई

जम्मू-कश्मीर में वीरगति पाने वाले सुखचैन सिंह का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार

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सरसा (सच कहूँ/सुनील वर्मा)। जम्मू-कश्मीर में 3 सितंबर को वीरगति को प्राप्त हुए गांव कुत्ताबढ़ निवासी करीब 30 वर्षीय सैनिक सुखचैन सिंह शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। सेना और पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। पांच वर्षीय बेटे आकाशदीप ने पिता को मुखाग्नि दी। जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही भारत माता की जय, वंदे मातरम् और सुखचैन फौजी अमर रहे के नारों से माहौल गमगीन हो गया। सुखचैन सिंह के अंतिम दर्शन के लिए गांव और आसपास के सैकड़ों लोग पहुंचे। रास्ते में भंभूर, मंगाला, मल्लेकां, माधोसिंघाना और ढाणी चंडीगढ़ सहित कई स्थानों पर ग्रामीण सड़क किनारे खड़े रहे और वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।

गांव पहुंचने पर पार्थिव शरीर को पहले घर ले जाया गया, जहां परिजनों और ग्रामीणों ने अंतिम दर्शन किए। प्रशासन की ओर से रानियां तहसीलदार शुभम शर्मा ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सेना की ओर से कर्नल ओपी सुमेरा, कर्नल इंद्र सिंह, सूबेदार नरेंद्र सिंह और सूबेदार मनजिंद्र सिंह तथा जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की ओर से लालचंद ने श्रद्धांजलि दी। ऐलनाबाद विधायक भरत सिंह बैनीवाल, संत ब्रह्मदास, संत हरिनामदास, वरिष्ठ भाजपा नेता जगदीश चोपड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष यतिंद्र सिंह एडवोकेट, सरपंच बेअंत सिंह संधू, अमीरचंद मेहता और ललित मोहन पोपली सहित अन्य लोगों ने भी पुष्प अर्पित किए। एएसपी आदर्शदीप सिंह और डीएसपी सुभाष चंद्र भी मौजूद रहे।

 2015 में हुए थे भर्ती 

सुखचैन सिंह वर्ष 2015 में सेना में भर्ती हुए थे। करीब 11 वर्ष की सेवा के दौरान उन्होंने देश की रक्षा को अपना कर्तव्य माना। परिजनों के अनुसार उन्हें 10 दिन की छुट्टी पर घर आना था। बेटे आकाशदीप का जन्मदिन 1 अक्टूबर को है और परिवार उनके घर लौटने का इंतजार कर रहा था। परिवार में पत्नी निर्मल कौर, माता अमर कौर, भाई सर्वजीत सिंह और पुत्र आकाशदीप हैं।

अंतिम यात्रा आधे घंटे रोकी, प्रशासन पर नाराजगी जताई

अंतिम यात्रा आधे घंटे रोकी, प्रशासन पर नाराजगी जताई

अंतिम यात्रा शुरू होने से पहले परिवार ने पार्थिव शरीर को गांव ले जाने के दौरान करीब आधे घंटे के लिए यात्रा रोक दी। परिवार का आरोप था कि तीन दिन से किसी प्रशासनिक अधिकारी ने उनका हालचाल तक नहीं लिया। परिजनों का कहना था कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि घर पहुंचते हैं, लेकिन ऐसे समय में परिवार से मिलने कोई नहीं आया। उन्होंने मांग की कि कोई जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन दे।

ऐलनाबाद डीएसपी ने एसपी से फोन पर बात कराने की बात कही, लेकिन ग्रामीणों ने इससे इनकार कर दिया। करीब 30 मिनट तक अंतिम यात्रा रुकी रही। बाद में ग्रामीणों ने परिवार को समझाया और भरोसा दिलाया कि पूरा गांव उनके साथ है तथा जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर परिवार की मांगें रखी जाएंगी। इसके बाद अंतिम यात्रा आगे बढ़ी और राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

खराब मौसम के कारण सड़क मार्ग से लाया गया पार्थिव शरीर

शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी से सुखचैन सिंह का पार्थिव शरीर विमान से पठानकोट लाया गया। खराब मौसम के कारण आगे की यात्रा विमान से नहीं हो सकी। इसके बाद पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से सड़क मार्ग से सरसा लाया गया। शुक्रवार दोपहर करीब 2 बजे पठानकोट से रवाना हुई एंबुलेंस रात करीब 11 बजे सरसा एयरफोर्स स्टेशन पहुंची। रात में पार्थिव शरीर एयरफोर्स स्टेशन में रखा गया और शनिवार सुबह गांव कुत्ताबढ़ ले जाया गया।

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Sirsa News: पति को नमन करती शहीद की पत्नी तथा रानियां तहसीलदार शुभम शर्मा श्रद्धांजलि देते। छाया: दीपक कुमार

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